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मार्च, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

व्यंग्य // अब चीटर को स्मार्ट कहा जाता है . . .।

मल्लूह काका की गाँव में में बड़ी धाक थी। बड़ा आलीशान मकान था। दो-दो चार चक्का था। बेटा दोनों बाहर बढ़का शहर में रह कर टेक्निकल पढाई करता था। काम कुछ खास नही करते थे लेकिन लोग उनके यहाँ बहुत आता जाता था। सब सरकारी ऑफिस में उनका पहुँच था। थाना-ब्लॉक, कलेक्टेरिट, कोर्ट-कचहरी, पंचायत, सरकारी हॉस्पिटल सब जगह हाकिम-मुलाजिम से उनकी काफी दोस्ती थी। सरपंच-मुखिया, विधायक-सांसद, दरोगा-मनेजर सब लोग उनके यहाँ आते जाते थे। यही कारण था गाँव में उनकी बड़ी धाक थी। मुसीबत में जब भी  कोई आता था, सबसे पहले मल्लूह काका के दरवाजे पर ही जाता था। आदमी भी बहुत नेक थे, दिल खोल कर सबका मदद करते थे।                   एक बार गंगुआ का अप्पन भाई से झगड़ा हो गया। बात कुछ खास नही था, बस गंगुआ की बकरी बगल में उसके भाई के खेत में चली गयी। उसका भाई समझाया कि बकरी बाँध कर रखा करो, हटिया से सब्जी लाने में अखर जाता है। सामने बारी में जब भी नेनुआ और कद्दू लगाते हैं, बकरी सत्यानाश कर देता है। दस दिन पहले बाजार से खरीद कर बैंगन का पौधा लगाये थ...

व्यंग्य // सरकार को चाहिये फोकटिया कर्मचारी . . .

सुबह का समय था। मंग्लु काका गाय का गोबर उठा कर नाद में दाना-पानी डालने जा रहे थे। तभी उधर से गंगुआ गुजर रहा था, मंग्लु काका को देखते ही बोला "राम ! राम ! काका" काका भी मंग्लु के सुर में सुर मिलाते बोले  "राम! राम ! गंगुआ। इतना सुबह मुँह फुलाये कहाँ चल दिया रे गंगुआ।" गँगुआ झल्लाते हुए बोला "ए काका, ई बेगारी क्या होता है हो" काका हँसते हुए "अब क्या हुआ जी! और ई सुबह-सुबह बेगारी के बारे में जानने को तुमको क्यों सूझा???" का बोले काका "आज सुबह-सुबह बाबूजी इहे बात पर गरिया दिये हैं!!! बोले ज्यादा मुखीयाजी का बेगारी मत किया करो। नेता लोग सिर्फ लोगन के खून चूसना जानता है। ऐसे तुम्हारा जिंदगी नही कटने वाला है। घर में बहु रोते पीटते रहती है कि बाबूजी हमनी के भँसा दिये। अरे हमलोगों का छोड़ो अपन बेटा के बारे में ही सोचो। महँगाई का ज़माना है। उसको कैसे पढाओगे, लीखाओगे। आज बढिया से नही पढ़ाए तो कल तुम्हारे तरह ऊ भी केकरो चमचागीरी करेगा।" हमको तो काका बहुत गुस्सा आ रहा था। अब आप ही बताईये मुखीयाजी हमको ठेकेदारी दिये हैं कि नही। बाबू जी को बोले त...

व्यंग्य // ऐसे तो देश बरबाद हो जायेगा

गाँव की चौपाल पर जमघट लगी थी। तभी मंग्लु काका उधर से गुजर रहे थे। चौपाल के पास पहुँचते ही उन्हें  माहौल कुछ ग़मगीन महसूस हुआ। फ़िर क्या था अपने मिलनसार स्वभाव के कारण उन्होंने पूछ दिया  " क्या हुआ रे , गंगुआ " गंगुआ रजनीगांधा का पीक फेंकते हुए बोला " मत पूछिये काका , ई  लोग देश को बरबाद कर देगा !!! आप ही बताईये आपके समय मे स्कूल में जो  पढाई होता था , अब होता है क्या ?? काका बोले  " ना रे गंगुआ , बिल्कुल " गंगुआ फ़िर तमतमाते हुए बोला  "फ़िर ई मास्टर लोग एगो नया ड्रामा शुरू कर दिया है , जानते हैं ई लोगों के चाहिये - सामान काम का सामान वेतन " काका बोले  "अरे गंगुआ ए  में तुमको का दिक्कत है। तुम्हारा नेतागिरी कैसा चल रहा है" गंगुआ नाराज होते हुए बोला "आप जो है न काका बात समझते हैं नही , नेतागिरी हमलोग पंचायत के विकास के लिये करते हैं। गाँव का बच्चा लोग बढ़िया से नही पढ़ पा रहा है , और आपको कोई चिंता ही नही है। कुछ  मास्टर पटना गया है विधानसभा घेराव के लिये, कुछ ईमानदार मुख्यमंत्री के पुतला दहन में कलक्टरिएट गेल है। जे लोग बच गया है , उ लो...

व्यंग्य // वोट दिया तो अब झेलो

सांसदों की पेंशन बंद करने के सवाल पर अरुण जेटली ने कहा, सरकारी धन को खर्चने का अधिकार केवल संसद को है

कविता // दर्द की दास्तां

✍🏻✍🏻 मेरी काबिलियत पर शक करने वाले तू अपनी काबिलियत की डिग्री तो दिखा हम बोलते नही पर काम बोलता है किसी के नाम मे क्या रखा है इम्तिहान और इम्तिहान का परिणाम बोलता है लोग मी...

कविता // वक्त

✍🏻✍🏻 ऐ वक्त थोड़ा वक्त दे मुझे बहुत कुछ भुलाना है मुझे रूठना भी भूल गया हूं, रूठे को मनाना भी भूल गया हूँ, कागज के नाव पर सवारी करके दिल को बहलाना है मुझे जिंदगी बहुत कुछ दिया है तूने, थोड़ा हिम्मत मुझे और दे, कुछ और जिंदगी को सजाना है मुझे अभी बहुत कुछ भुलाना है मुझे  . . . - बिपिन कुमार चौधरी

कविता // मैं बुरा हूँ

शिकवा नही है किसी से पर गम तो है जिनके लिये मैंने खुद को नज़रंदाज़ किया उनमे से कुछ ने मेरी औकाद बताई थी मुझे अपनी औकाद बढ़ाने का शौक भी नही बस कुछ हसीन लम्हे तू दे दे किसी के काम आ ...

२५. कविता // पैसा @

पैसा ने दिन दिखाया ऐसा कुत्तों को देखा उनकी दुम भी देखी कभी जो भौंकते थे चेहरा देख कर उन्हे तलवा चूमते भी देखा पैसों के लिये मैंने खुद को भले ना गिराया हो पर इस पैसे ने मुझे बहुत गिराया है अगर ये है तो बहुत कुछ पास है अगर ये होता तो बहुत कुछ पास होता कुत्तों को भी देखता भौंकते भी देखता तलवा चाटते  भी देखता पर राज़ की बात शायद नही जान पाता जिंदगी बहुत प्यार है मुझे तुमसे पर तुम बहुत बेवफा हो मैंने कई जिंदगी सजाने को सोचा कि तुम मुझे प्यार करोगी पर तुमने हमेशा मुँह चिढाया कि तेरी औकाद है क्या ???? जब जिंदगी से नफरत होने लगी तभी ये पैसा आया थोड़ी इज्जत थोड़ा प्यार लाया पर जिंदगी अब मै तुम्हे फ़िर प्यार करने लगा हूँ इन पैसों के कारण नही वो तो है मेरी   . . . 😜😜😜 - बिपिन  कुमार चौधरी

कविता // कलम की धार

कलम की धार थोड़ी कुंद पड़ गयी है वर्ना लोग कभी इसके दीवाने थे बहुत दिनों बाद फुरसत मिली है अपने पहले प्यार से ईश्क फरमाने के अब तो इस प्यार मे कुछ ज्यादा सुकून  मिलता है पहले ये...

२४. कविता // दिल को फ़िर से बच्चा बना दे . . . @

वो दोस्त कहाँ गये जो देखते ही मुस्कुरा देते थे उन्हे सिर्फ मेरी फिक्र थी मेरी बट्वे की नही आज रिश्ता उतना ही घन्सिठ होता है जितना बटवा भारी हो वरना कोई आँख भी नही मिलाता चाहे सड़क कितनी भी संकरी हो निगाहों से गिर कर भी लोग उनसे निभा लेते है आपका बटवा अगर भारी हो तो लोग सिर पर उठा लेते हैं धोखा खा खा कर बहुत कुछ सीखा है लेकिन  कैसे कह दूँ अब ठगा नही जाऊँगा इसलिए एक चीज मुझे लौटा दे मेरे दिल को फ़िर से बच्चा बना दे वैसे तो जंग मैंने ही छेड़ा है क्योंकि इम्तिहान से मुझे डर नही लगता ये बात अलग है कि तू इम्तिहान सबका लेता भी नही पर हो सके तो एक चीज़ मुझे लौटा दे मेरे दिल को फ़िर से बच्चा बना दे - बिपिन  कुमार चौधरी

मुसाफिर

ए वक्त तेरी रफ्तार बहुत तेज है पर रुकना मुझे भी आता नही है ठोकरें तो मैंने भी बहुत खाई है पर झुकना मुझे भी आता नही है अबकी जख्म कुछ ज्यादा  गहरा है पर तू भर देगा उसे भी क्योंकि तुझे पता है कि तेरा ये मुसाफिर कभी ठहरा नही है - बिपिन कुमार चौधरी

डर . . .

लोग हर मंज़िल को मुश्किल समझते है, हम हर मुश्किल को मंज़िल समझते है. बड़ा फ़र्क है लोग और हमारे नज़रिए में, लोग दिल को दर्द और हम दर्द को दिल समझते है.. !!! आपने तो गुलाब देखा होगा , ह...

२६. बलिदान @

वो लोग कुछ और थे . . . उनकी बात कुछ और थी . . . लोग पूछते हैं उन्होंने क्या दिया आत्मसम्मान के लिये अपने देश के लिये हम भारतीयों के लिये अपनी मिट्टी के लिये औरतों की सुरक्षित आबरू के लिये बच्चों के स्वर्णिम भविष्य के लिये उन्होंने वो दे दिया जिसके लिये आज लोग कहते हैं कि वो है तो जहाँ है नमन उस वीर सपूत को जिसने अपनी मातृभूमि के लिये अपना सबकुछ समर्पित कर दिया . . . - बिपिन  कुमार चौधरी

खाली सफे . . .

मुझे रहने दो कागज़ पर ही लफ्ज़ बनकर यहाँ खुलती है जुंबा होंठ सील जाते है कहना नहीं चाहते कमबख्त चंद शेर धोखा दे जाते है और क्यों गला घोटूं नीली स्याही का जब खाली सफ़े भी बहुत कु...

जख्मों के निशान

✍🏻✍🏻✍🏻 आज भर लिया है हमने क़लम में ज़ख्मों का लहू गम इस बात का नही कि जो हासिल करना था कर नही पाये गम तो इस बात का है  कि जिनकी  तबाही रोकने के लिये खुद को बरबाद कर लिया उसी ने हमे...

सपना . . .

✍🏻✍🏻 चोट बहुत गहरी है समंदर मे तैरने की कोशिश ना करो अपना शौक किसी तलाब मे पुरा कर लेना सपनों की दुनिया मे जीने वाले की कमी नही पर असली दर्द वो बता नही सकते जिनका हकीकत सपना ब...

२२. आदमी का रंग . . . @

कुत्ता चाहे जितना तगड़ा हो दुम टेढ़ी होती है आदमी जितना दुष्ट हो जुबां उतनी मीठी होती है वैसे मीठा मैं भी बोलता हूँ किसी की जिंदगी मे ज़हर नही घौलता हूँ पर इन मीठी जुबान वालों का दिल चाहे जितना काला हो चेहरा बहुत भोला होता है जब मतलब निकाल जाते हैं इनके हर शब्द शोला होता है इसका ये मतलब नही तीखी बोलने वाले बड़े अच्छे होते हैं विचार मे जिनकी सादगी हो जुबां भी शहद से मीठे होते हैं धोखा अक्सर लोग वहाँ खा जाते हैं जिनकी जुबां शहद सी मीठी हो लेकिन दिल अलबेली जलेबी हो ये गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं हर पल ढंग बदलते हैं ✍🏻   बिपिन कुमार चौधरी

कहानी // सफलता का रहस्य

खुद पर विश्वास  करने वाला हमेशा सफल होता है... बुलाकी एक बहुत मेहनती किसान था। कड़कतीधूप में उसने और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने रात दिन खेतों में काम कियाऔर परिणामस्वरू...

२७. जिंदगी @

ए जिंदगी सुना है तेरे  बहुत रंग है दुनियाँ तेरी बड़ी रंगीन है आदमी कुछ ज्यादा ही गिर गया है तू मान या ना मान मामला बड़ा संगीन है आरजू बड़ी हो कोई बात नही मंजिल मुसाफिर को ना मिले उतने बुरे हालात नही लेकिन दिमाग तो सदियों से बुरा रहा है दिल भी बुरा हो चुका है अब प्यार कोई दिल से नही हैसियत से करने लगा है कल तक लोग अपनो के लिये अपनी हैसियत मिटा देते थे आज हैसियत की फिक्र मे आदमी बेमौत मरने लगा है ✍🏻   बिपिन कुमार चौधरी

शिक्षा

"एगो सुंदर भोजपुरी कविता" बिहार बोर्ड करे लागल अब कड़ाई । का करीं पढ़ी की छोड़ दी पढ़ाई ।। पहिला में रहनी त कुछो ना बुझाइल, दूसरा में गइनी त कखगघ आइल । तीसरा में लइकन से कइनी लड़ाई , का करीं पढ़ी की छोड़ दी पढ़ाई ।। पहाड़ा याद भइल चौथा में आके, हेड सर से कहनी हम पांचवां मे आके । डरेस के पैसा बोलीं कहिया भेंटाई, का करीं पढ़ी की छोड़ दी पढ़ाई ।। छठा मे लगनी खूब गीत हम गावे, गीतवा हमार लागल सबकर के भावे । मन बा खेसरिया से भी आगे जाई, का करीं पढ़ी कि छोड़ दी पढ़ाई ।। सातवाँ मे छोड़ देनी बकरी चरावल, भूल गइनी सब हम सर के पढ़ावल । उम्मीद बा नौंवा में साइकिल भेटाई, का करी पढ़ी कि छोड़ दी पढ़ाई ।। फेल अगर मैट्रिक में हो भी  हम जाएम, त बन जाएम नेता घोटाला कराएम । रोज अखबार में नाम हमरो छपाई, का करी पढ़ी की छोड़ दी पढ़ाई ।।