सांसदों की पेंशन बंद करने के सवाल पर अरुण जेटली ने कहा, सरकारी धन को खर्चने का अधिकार केवल संसद को है
ब्रह्म-बाबा थान गाँव का एक मात्र ऐसा जगह था, जहाँ पूरे गाँव के बच्चे लोग बिना किसी भेदभाव के खेला करते थे। दरअसल ब्रह्म-बाबा थान के एक ओर बाभन टोली थी, जहाँ ब्राह्मणों की संख्या भले अधिक हो लेकिन सभी जाति के लोग वहाँ प्रेम-भाव से रहते थे। कुछ ही दूरी पर मुशहरी-टोला था जहाँ अधिकतर हरिजन और दलित-समुदाय के लोग के लोग निवास करते थे। ब्रह्म-बाबा थान के दूसरी ओर हाजी टोला था। यह एक बंगलादेशी मुसलमान बहुल गाँव था। ब्रह्म-बाबा थान दरअसल एक पीपल के पेड़ के नीचे का चबूतरा था जहाँ बाभन टोली के महिला और पुरुष अक्सर किसी शुभ कार्य से पहले पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लेने आते थे। ब्रह्म-बाबा थान से बस कुछ ही दूरी पर हाजी साहब का मजार था जहाँ हिन्दु-मुस्लिम दोनों ही सिर नवाते थे। यह कुल दो बीघा का परती जमीन ना सिर्फ हिन्दु-मुस्लिम बच्चों के खेलने और व्यायाम का स्थान था बल्कि हिन्दु-मुस्लिम के साझा पूजा-स्थली और गंगा-यमुनी संस्कॄति और गाँव के लोगों के आपसी भाईचारे का केन्द्र था। दरअसल यह जमीन बाभन-टोली के बनारसी काका का था, जो कुछ वर्षों पहले गंगा-धार में चला गया था। गंगा-धार से बाहर निकलने पर सभी ने ...
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