सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

मार्च, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

४. इबादत @

४. इबादत @ ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी ए रब, कर तूं कुछ ऐसी इनायत,  ख़त्म हो जाए कलह कष्ट का कहर, मानव जाति की सुरक्षा हो मुमकिन, आओ सब मिलकर बोलें आमीन... सुन मेरे परवरदिगार, ओ मेरे भगवान, कर रहे सब त्राहिमाम, संकट में इंसान, कर कुछ ऐसा करिश्मा, रुक जाए कोहराम, आओ सब मिलकर बोलें, जय श्री राम... गलतियां हमसे लाख हुई, हम तेरे ही संतान, तेरी रहमत की आरज़ू में तड़प रहे कई भाईजान, कर तूं कुछ ऐसी मेहरबानियां, हो सबको फख्र, आओ सब मिलकर बोलें, अल्लाह हो अकबर... तेरे हैरतअंगेज कारनामे, करता सारा जग नमन, स्वीकार कर हमारी प्रार्थना, कर दे ईर्ष्या द्वेष का पतन, लंगर में सब साथ बैठ, तेरे दरबार में माथा सकें टेक, आओ सब मिलकर बोलें, वाहेगुरु दा खालसा वाहेगुरु दी फतेह ...

बुरा ना मानो होली है, जोगीरा...

बुरा ना मानो होली है, जोगीरा... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी पलट पलट कर जिसने, गिड़गिट को भी किया शर्मसार, सिद्धांत गया तेल लेने, ऐसा सुशासन का सरकार, जोगीरा ... सरकारी खजाने पर बोझ बताकर,  वोट बैंक के लालच में किया शिक्षा का बंटाधार, समाजसेवा गया तेल लेने,  राजनीति बन गया भाई व्यापार, जोगिरा... देश नहीं बिकने दूंगा, नारे से राष्ट्रवाद था गुलजार, चौकीदार जागता रहा, देश बेचने वाला हो गया फरार, जोगीरा... फोर जी के द्रुतगामी स्पीड से, एक नई क्रांति का जियो ने किया संचार, पढ़ना लिखना भूलकर युवा, टिक टोक पर ढूंढ रहा रोजगार, जोगीरा... देश की बेटी अब जिंदा नहीं, हत्यारों के फांसी का कर रही इंतिज़ार, मां के आंखो का आंसू भी सुख गया, होली मुबारक उनको भी जिसने सिस्टम का किया बलात्कार, जोगीरा... मुखिया जी हैं थोड़े नाराज, सब ओर बढ़ गया भ्रष्टाचार, खुद की झोपड़ी बन गया महल, छह माह में बदले अपनी कार, जोगीरा... मास्टर सब बन बैठे नेता, शिक्षा सुधार पर करे कौन विचार, पढ़ने के नाम पर जिसकी मरती थी नानी, समाज को बताए शिक्षा सुधार का उपचार, जोगीरा...

९६. इज्जत की रोटी @

इज्जत की रोटी ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी तेरे शहर में आकर रहना शौक नहीं हमारा, अनकही मजबूरियों का मारा हुआ हूं, रूखी सूखी खा कर भी खुश रह लेता हूं, फिर भी बिना गुनाह तेरे शहर से निकाला गया हूं... अपनी मिट्टी की याद हमें भी साताती है, अपनों की याद हमें भी रुलाती है, तेरे टुकड़ों पर पलने का हमें शौक नहीं, अपनों के पेट की आग हमें यहां लाती है... हम मेहनतकशों का लहू पीकर, कुछ बन गए बादशाह, कितनों के सिर ताज है, अपने प्रदेश में हमारे हाथों को क्यों नहीं मिलता काम, यह आज भी बहुत बड़ा राज है, तेरा शहर बेशक बहुत खूबसूरत है, क्या तेरे शहर वालों ने इसे ऐसा बनाया है, अपने खून पसीने से इसे सींचा है हम बैगरतों ने, कभी सोचना हमने तेरे शहर में क्या पाया है, लगा कर लाख तोहमत हम पर, तेरे शहर ने इज्जत हमसे बहुत पाया है, मजबूरियों में अपने शहर से कर दिया बेदखल, यह सोच हमारा आंख भर आया है... खुश रहना अपनी जन्नत में, हम अपनी बदनसीबी जी लेंगे, हमारे बच्चे भूखे मर गए तो क्या, खुद अपनों के दर्द का आंसू पी लेंगे... घूट घूट कर यूं हम लोगों को, अब जीने की आदत हो गई है, अख़बार के पन्नों को पढ़ सब खुश हैं, ...

१२६. कोरोना रहस्य @

#कोरोना_रहस्य ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी इंसानी जान के दुश्मन से बिल्कुल आप डरो ना। जान की बाजी लगा बचा लेंगे, हम पर भरोसा करो ना।। बेवकूफ बन बन कर, बिल्कुल अस्पताल भरो ना। अपनी सुरक्षा के लिए, कुछ दिन घर पर ही सब्र करो ना।। साहसी लोगों का यह देश, लेकिन उन्मादी बनो ना। इस मुसीबत से निकल जाएंगे हम, थोड़ा सहयोग करो ना।। व्यापार का हुआ बहुत नुकसान लेकिन बेमौत मरो ना। भूखों का भरे पेट, थोड़ा दान का साहस करो ना।। खिलवाड़ किया है हमने, ऊपर वाले पर दोष मढ़ो ना। विपत्ति से संघर्ष का मिले साहस, थोड़ा उनकी इबादत करो ना।। जिसने यह सुंदर सृष्टि बनाया, उसी के नाम पर लड़ो ना। आदमी हो आदमी बन, आपस में प्रेम करो ना।। विज्ञान है बड़ी उपलब्धि, स्वार्थ में अज्ञानी बनो ना। जिंदगी बना देगा यह स्वर्ग, सिर्फ इसका दुरुपयोग करो ना।। आतंक से हो आतंकित, भय से तुम बिल्कुल मरो ना। विशेषज्ञों की मानो राय, क्या करेगा यह कोरोना।।

५. भेद @

भेद ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी अपनी जान बचाने की खातिर, आज इंसान कुछ दिनों के लिए कैद है, असली दर्द हम बेजुबानों से पूछो, बिना गुनाह आजीवन कैद हैं, इस कैद से निकल, जीवन नहीं बचा पाओगे, तेरे कैदी होने का यह मूल भेद है, तुम्हारे शौक की खातिर आजीवन आंसू बहाता हूं, क्या तुमलोगों को कोई खेद है... तुम्हारी तरक्की से हमें शिकवा नहीं, फिर आपस में क्यों इतना मतभेद है, अपनी जाति के जीव भी तुम्हारे दुश्मन हैं, किस काम का बाइबिल, कुरान और तुम्हारा वेद है...

६. कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम... @

कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी काम तो है यूं ही बदनाम, बहुत मुश्किल दिन रात आराम, जिंदगी को खूबसूरत बनाता काम, कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम... सारी दुनिया है परेशान, हिन्दू हो या हो मुसलमान, सारा धर्म तेरे लिए एक समान,  कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम, गिरफ्त में तेरे आए जो इंसान, दूर से करता उसे हर कोई सलाम, सोचे मूर्ख किसके लिए बेचा ईमान, कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम, आता नहीं है बैंक बैलेंस भी काम, व्यर्थ हुआ गलत सही काम तमाम, कठोर सच्चाई से रू ब रू होता इंसान, कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम, पड़ोसी भूखा लोग बेफिक्र खाए पकवान, इस सोच को भी तूने बदल दिया हैवान, कोई पड़ोसी नहीं हो संक्रमित, सब परेशान, कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम, मानव का हत्यारा बेशक तू बदनाम, इंसानियत खुद भूल कर, आदमी बोले दोषी भगवान, निज स्वार्थ में अंधा कितना गिर चुका इंसान, कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम, खोजे सब इस समस्या का समाधान, सबको आया समझ क्यों संकट में है जान, प्रकृति से खिलवाड़ और गलत विज्ञान, कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम...

७. इंसानियत @

इंसानियत का सबक ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी फ़ुरसत नहीं, कितना व्यस्त थे हम, कोरोना ने ढाया ऐसा सितम, सबके सब बेरोजगार हो गए, दर्द पूछो उनसे जो बीमार हो गए... दिहाड़ी से जिनका चलता था चूल्हा, लॉक डाउन से कितना लाचार हो गए, सरकारी मदद एक मात्र ठिकाना, बदनसीबी पूछो उनसे, खैरात से जो महरूम हो गए... कोरोना से लड़ाई में सफलता का राज, रहे नहीं कोई घर दाने को मोहताज, बच्चों के आंखो का आंसू, पेट की आग, गरीबों का विद्रोह कराएगा उनसे विश्वासघात... मजबूरियों से अगर कोई लाचार हो गया, बंदा पड़ोस का कोई बीमार हो गया, ख़तरा सभी पर बड़ा मंडराएगा, लाखों का दौलत कोई काम नहीं आएगा, बढ़ाओ होंसला, करो जरूरतमंद की मदद, ख़तरे में मानव जाति, बचाएगा इंसानियत, कोरोना हारेगा, ख़तम होगा यह मुसीबत, शर्त बस इतना, हमारा और पड़ोसी का हो हिफाज़त...

१२७. आओ करें चीन को दूर से सलाम @

आओ करें चीन को दूर से सलाम ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी पूरी दुनिया कर रही त्राहिमाम, घर बैठे सभी छोड़ काम धाम, तेरी तरक्की हो तुझे मुबारक, आओ करें चीन को दूर से सलाम, खुद अपने देश को तूने बचा लिया, सारी दुनियां में जहर फैला दिया, तेरी नियत हमेशा  रही है बेईमान, आओ करें चीन को दूर से सलाम... मानवता से नहीं तेरा कोई सरोकार, कर दिया सारी दुनियां को बीमार, भरोसे का दिया तूने अच्छा इनाम, आओ करें चीन को दूर से सलाम... संक्रमितों को दूसरे देश भेजा नहीं होता, पूरी दुनियां आज इस कदर नहीं रोता, स्वार्थसिद्धि में बन गया तू कितना हैवान, आओ करें चीन को दूर से सलाम... धोखे में रख दुनियां को पहुंचाया आघात, चीन से करे नहीं कोई आयात निर्यात, यही होगा तेरी तरक्की का माकूल इनाम, आओ करें चीन को दूर से सलाम...

८. कोरोना तूने पागल सबको बनाया है @

कोरोना तूने पागल सबको बनाया है... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी काम धंधा सब हुआ सरपट चौपट,  सड़क पर निकलते पुलिस मारे लट्ठ, यह दुर्दिन ऐसा कैसा आया है, कोरोना तूने सबको पागल बनाया है, गरीब हो या हो आदमी खास, मजदूर हो या कोई सरताज, तेरे खोफ़ ने सबको डराया है, कोरोना तूने पागल सबको बनाया है, कीमती था जिनका एक एक पल, काम नहीं आया पद और धनबल, आदमी को ओकाद खूब बताया है, कोरोना तूने पागल सबको बनाया है, एक शिकायत तुझसे है शैतान, गरीब आदमी कुछ ज्यादा परेशान, यह फर्क तूने भी दिखाया है, कोरोना तूने पागल सबको बनाया है, तुमसे उन्हें खौफ नहीं, जिनके घर नहीं रोटी, मौत से खेलना उनके लिए बात छोटी मोटी, ऐसे लोगों को ही खूब सताया है, कोरोना तूने पागल सबको बनाया है, मानवता करे मानव से पुकार, करो सबकी मदद बचा लो संसार, यह संदेश सारे जहां में फैलाया है, कोरोना तूने पागल सबको बनाया है...

१२९. घर बैठ बचा ले तू अपनी जान रे... @

घर बैठ बचा ले तू अपनी जान रे... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी बचा ले, बचा ले, बचा ले... घर बैठ बचा ले तू अपनी जान रे... यहां जिंदगी के पड़े हैं लाले, रूखा सूखा कुछ भी खा ले, अभी बांट मत तूं अपना ज्ञान रे, घर बैठ बचा ले तूं अपनी जान रे... माना बरबाद तूं हुआ है, बता आबाद कौन हो रहा है, इतना भी तूं मत हो परेशान रे, घर बैठ बचा ले तूं अपनी जान रे... कहर कोरोना ने है बरपाया, बाहर से तेरे मोहल्ले है कोई आया, आइसोलेशन वार्ड भेजने का कर इंतिजाम रे, होकर सतर्क बचा ले सबकी जान रे... यहां दुनियां पर अाई है आफत, लालच में बेच ना अपनी सराफत, कालाबाज़री कर मत बन हैवान रे, ले सही दाम, भला करेंगे तेरा भगवान रे, हर घर में है नहीं पैसा, कर मदद कोई रहे नहीं भूखा, कुछ दिनों के लिए बन जाओ इंसान रे, करके मदद बचा ले तू सबकी जान रे... बाहर तो होगा ही जाना, जरूरी सामान घर में है लाना, भीड़ से बच मुंह पर लगा ले मास्क रे, खुद बच बचा ले तू अपनों की जान रे... लक्षण अगर किसी में नजर आए, सूखी खांसी के साथ बुखार भी आए, जल्दी से भेजो उसे अस्पताल रे, सरकार की बातों को मानना ही मात्र समाधान है... बचा ले, बचा ले, बचा ल...

९. एहसास @

एहसास ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी बेजुबानों को करके पिंजरे में बन्द, शौक हमने अपना खूब पूरा किया है, घरों में कैद होकर फिर क्यों बैचैन हैं, सोचो बेजुबानों को कितना दर्द दिया है... दीवारों से टकड़ा टकड़ा कर, अक्सर परिंदों के पंख टूट जाते हैं, अपनी बेबसी पर वो छटपटाते हैं, तब हम मानव खूब खिलखिलाते हैं... भावनाओं के पैरों में घुंघरू बांध कर, दूसरों को नचाने में मजा बहुत आता है, अपनी भावनाओं से जब खिलवाड़ होता है, घुंघरुओं की आवाज में भी आनंद नहीं आता है... अपनी जान पर जब आफत आई है, आज कोई पंख हमारे काम नहीं आई है, तिलमिला कर खुद पर खीझ जाते हैं, पिंजरे का दर्द हमें एहसास दिलाते हैं

१०. प्रकृति का बदला @

प्रकृति का बदला ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी दहशत के इस माहौल में, मौत का आतंक छाया है, मानव तू कितना बुद्धिमान, प्रकृति ने औकाद बताया है... चमगादड़ के सूप से भले नहीं, जैविक हथियार से ही आया है, अपनी मौज की खातिर तूने, कितने जीवों का अस्तित्व मिटाया है अपनी बादशाहत की खातिर, जिसने धरती पर उत्पात मचाया है, उस विवेकशील जाति पर ख़तरा देख, ईश्वर ने भी खूब आंसु बहाया है, जिंदगी सबकी कैदखाना बन चुकी है, संक्रमित होते अपनों की भोहें तनी है, सूक्ष्मजीव कोरोना ने ऐसा कहर बरपाया है, अपनों ने भी लाशों को गले नहीं लगाया है, तरक्की का चहुंओर घमासान है, प्रदूषित वातावरण सब परेशान है, यह कैसा आफत हमने बुलाया है, जहां कोई विज्ञान काम नहीं आया है, अपनी सुविधाओं की खातिर, सारी सीमाएं हम तोड़ गए हैं, कई नदियां नाला बन चुका है, कई जलिय जीव विलुप्त हो गए हैं  ... प्रकृति से इस बेरहम छेड़छाड़ का, कीमत मानव जाती को चुकाना होगा, धरती पर मानव जाती की सुरक्षा हेतु, मानव को अंदर का हैवान मिटाना होगा...