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कविता // दर्द की दास्तां

✍🏻✍🏻

मेरी काबिलियत पर शक करने वाले
तू अपनी काबिलियत की डिग्री तो दिखा

हम बोलते नही
पर काम बोलता है
किसी के नाम मे क्या रखा है
इम्तिहान और इम्तिहान का परिणाम बोलता है

लोग मीनार की ऊँचाई देख कर हैरान होते हैं
लेकिन असली वजन चोटी से क्या पूछते हो
वो तो नींव का चट्टान बोलता है

हमारी तो नींव ही हिला दी गयी
और 
कोई दर्द का दास्तां पूछता है ।

चोट बहुत गहरी है
समंदर मे तैरने की कोशिश ना करो
अपना शौक किसी तलाब मे पुरा कर लेना

सपनों की दुनिया मे जीने वाले की कमी नही
पर असली दर्द वो बता नही सकते
जिनका हकीकत सपना बन गया हो

जिंदगी आज भी उसी रफ्तार मे है
जैसा सदियों पहले था ,
पर आने वाली कई सदिया भी खोये हुए  पल की कमी को पुरा नही कर सकता . . .

गिर कर सम्भलने की आदत है मुझे,
बस खामोशी ने दगा दे दिया है ,
जिंदगी ने बहुत कुछ सिखाया है ,
पर उन सपनों का क्या करूँ जो सोने नही देती मुझे . . .

✍🏻✍🏻

कांटों पर चलना मुश्किल नही
पर कांटों के जिस पेड़ ने लहूलुहान कर दिया हो
उसी को सींचना आसान नही होता

अरे सजा तो हम अपनी गलती का पाते हैं
हर गम का जिम्मेदार भगवान नही होता

भगवान समझ कर जिसकी हर खता को माफ किया
वो अपनी गलती का आरोपी भगवान को बताये
ऐतबार करना आसान नही होता

अतीत को बदला नही जा सकता
भविष्य की नींव अतीत ही है
महल की ऊँचाई बढाना बहुत आसान  है
पर नींव को हिला देने वाले को माफ करना
आसान नही होता

✍🏻✍🏻

✍🏻✍🏻

दिल के टूटने की बात मत कर यार
जिस पत्थ र  ने दिल तोड़ा हो
उसी पत्थ र  को भगवान की तरह
पूजने का दिल मैंने भी नही पाया  है

वक्त ने मजबूर बना दिया
वरना दिल मे आरजू कुछ और थी
ये दुनिया ने कैसा दस्तूर बनाया है
दर्द दे कर बोलते हैं
भूल जा उसे
जिंदगी से तूने कुछ ज्यादा ही पाया है  . . .

✍🏻✍🏻

- बिपिन  कुमार चौधरी

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