गाँव की चौपाल पर जमघट लगी थी। तभी मंग्लु काका उधर से गुजर रहे थे। चौपाल के पास पहुँचते ही उन्हें माहौल कुछ ग़मगीन महसूस हुआ। फ़िर क्या था अपने मिलनसार स्वभाव के कारण उन्होंने पूछ दिया " क्या हुआ रे , गंगुआ "
गंगुआ रजनीगांधा का पीक फेंकते हुए बोला " मत पूछिये काका , ई लोग देश को बरबाद कर देगा !!! आप ही बताईये आपके समय मे स्कूल में जो पढाई होता था , अब होता है क्या ??
काका बोले " ना रे गंगुआ , बिल्कुल "
गंगुआ फ़िर तमतमाते हुए बोला "फ़िर ई मास्टर लोग एगो नया ड्रामा शुरू कर दिया है , जानते हैं ई लोगों के चाहिये - सामान काम का सामान वेतन "
काका बोले "अरे गंगुआ ए में तुमको का दिक्कत है। तुम्हारा नेतागिरी कैसा चल रहा है"
गंगुआ नाराज होते हुए बोला "आप जो है न काका बात समझते हैं नही , नेतागिरी हमलोग पंचायत के विकास के लिये करते हैं। गाँव का बच्चा लोग बढ़िया से नही पढ़ पा रहा है , और आपको कोई चिंता ही नही है। कुछ मास्टर पटना गया है विधानसभा घेराव के लिये, कुछ ईमानदार मुख्यमंत्री के पुतला दहन में कलक्टरिएट गेल है। जे लोग बच गया है , उ लोग बच्चा का कॉपी जाँच नही कर रहा है। अब आप बताइए देश बरबाद होगा कि नही। ऐसे भी ई मास्टर लोग कौन काम करता है , जो हर साल वेतन के लिये झंझट करते रहता है।"
काका बोले "बेटा तुम बात तो ठीक बोल रहे हो। खैर ई बताओ कल तुम्हारा मोहना से झगड़ा काहे हो गया।"
गंगुआ बोला " नय जानते हैं काका , अरे साला बैमानी पर उतर गया था। हम सोचे कि मोहना बढिया आदमी है लेकिन ई तो साला बईमान निकला।
काका बोले " बेटा क्लियर बताओ, हम कुछ नही जानते हैं।"
गंगुआ बोला " अरे काका मोहना के साथ पार्टनर में चौक जाने वाला रोड बनाने का ठेका मुखियाजी से लिये थे।
मुखियाजी पहले 10% ले लिये। ब्लॉक का स्टाफ सब मिलकर 15% खा गया। विधायक जी को उद्घाटन के लिये बुलाये, गाँव के लईकन सब पार्टी माँगा। 5% ऊ सबमें भी खर्च हो गया। काम फाइनल होने पर इंजीनियर साहब भी साइन करने का 5% माँग लिया। बड़ा मुश्किल से टेंडर का 15% बचा होगा। मोहना को बोले मेरा हिस्सा दो तो बोला कि तुम ठेकदारी लाइन में अभी नया हो 5% ले लो। हम भी कहाँ कम थे तुरंत कालर पकड़ लिये बोले साला काम जब बराबर किये तो बराबर बाँट नही तो घर भी नही जा पाओगे। अब आप बोलिये काका क्या गलत बोले "समान काम किये तो समान हिस्सा होगा कि नही।"
मंग्लु काका हैरान होते हुए बोले " बात तो ठीक बोलते हो बेटा -समान काम किये तो हिस्सा भी समान मिलना ही चाहिये। नही तो तुम उसको जिंदा घर भी नही जाने दोगे तो क्या गलत है। पर एक बात बताओ बेटा इतना लोग को पैसा बाँट के जो सड़क तुम बनाये उससे क्या देश बरबाद नही होगा????"
गंगुआ जोरदार ठहाका लगाते हुए बोला "क्या काका आप तो कुछ समझते ही नही हैं, नेतागिरी और ठेकेदारी में ई सब चलते रहता है। अरे ऊ मोहना तो समान काम का हिस्सा हमको दे दिया काका नही तो कल गोली चल जाता।"
मंग्लु काका मुस्कुराते हुए चल दिये।
रास्ते में मन ही मन सोचने लगे कि क्या हो गया है इस पीढ़ी को जिसे सरकारी निर्माण में हो रही लूट खसोट नही दिखती है बल्कि उस लूट में भी समान हिस्सा चाहिये और देश के भविष्य का निर्माण करने वाले शिक्षकों के "समान काम के लिये समान वेतन की मांग" पैसे की बरबादी लगती है !!!!!!
शाम के समय यही गंगुआ दारू बंदी के इस सुशासन में तारी के नशे धुत्त हो कर सरेआम हेड मास्टर को MDM वाला पैसा से मुर्गा खिलाने की जिद्द कर रहा था और मास्टर साहब बचत नही होने का रोना रो रहे थे। पर गंगुआ जिद्द पर अड़ा था तभी मंग्लु काका पहुँच कर गंगुआ को समझाये के बेटा मास्टर साहब को परेशान मत करो आठ माह से वेतन नही मिला है और मास्टर साहब का बेटा दस दिन से हॉस्पिटल में एडमिट है।
अब तुम ही बताओ कि तुम्हारे देश के बच्चों को कैसे पढ़ायेंगे . . .
ये सब सुनते ही गंगुआ का नशा टूट चुका था !!!!!
तभी मंग्लु काका समझाते हुए बोले कि बेटा ना सिर्फ तुम्हे बल्कि इस देश के सभी नेता को बहुत जल्द समझना होगा कि इस तरह अगर गुरु का अपमान होता रहा तो ये देश बरबाद हो जायेगा . . .
- बिपिन कुमार चौधरी
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