ए जिंदगी सुना है तेरे बहुत रंग है
दुनियाँ तेरी बड़ी रंगीन है
आदमी कुछ ज्यादा ही गिर गया है
तू मान या ना मान
मामला बड़ा संगीन है
आरजू बड़ी हो
कोई बात नही
मंजिल मुसाफिर को ना मिले
उतने बुरे हालात नही
लेकिन दिमाग तो सदियों से बुरा रहा है
दिल भी बुरा हो चुका है
अब प्यार कोई दिल से नही
हैसियत से करने लगा है
कल तक लोग अपनो के लिये
अपनी हैसियत मिटा देते थे
आज हैसियत की फिक्र मे
दुनियाँ तेरी बड़ी रंगीन है
आदमी कुछ ज्यादा ही गिर गया है
तू मान या ना मान
मामला बड़ा संगीन है
आरजू बड़ी हो
कोई बात नही
मंजिल मुसाफिर को ना मिले
उतने बुरे हालात नही
लेकिन दिमाग तो सदियों से बुरा रहा है
दिल भी बुरा हो चुका है
अब प्यार कोई दिल से नही
हैसियत से करने लगा है
कल तक लोग अपनो के लिये
अपनी हैसियत मिटा देते थे
आज हैसियत की फिक्र मे
आदमी बेमौत मरने लगा है
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
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