#गरीबों_की_बढ़ी_चर्बी_से_सब_परेशान (व्यंग्य) ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी फेंकना ऋषि आग बबूला हो कर पुलिस को भद्दी भद्दी गालियां दे रहा था। तभी जामुन काका ने फेंकना को टोका "क्या हुआ रे फेंकना, काहे दरोगवा को गरिया रहा है। फिर आज सौतारी में तुमको धड़ लिया क्या ? फेंकना यह सुनते ही गर्म हो गया, बोला काका इज्जत करते हैं तो ढ़ेर मत बोला कीजिए। आपका बेटवा कौन ऐसा दिन है, जो खा पी कर रात में महाभारत नहीं करता है लेकिन आपका या दारोगवा का का मजाल है कि उसे कोई कुछ बोल दे। आख़िर वह सरपंच का बेटा है और मैं एक गरीब आदमी हूं और मुंह खोलवाए हैं तो सुन लीजिए पिछले बार जब आप ही दारोगवा को बुला कर धड़वाए थे तो यही शर्त पर छूटवाए थे कि दोनों को शाम तक दो देशी मुर्गा के साथ साथ एक बोतल ब्रांडेड फुल पहुंचवाना होगा और आए हैं नाटक बतियाने। तब तक थोड़ी भीड़ भी जमा हो गई थी। सरेआम अपनी मिट्टी पलित होते देख सरपंच जामुन काका ने पैंतरा बदला। बोले तुम तो नाहक गर्म हो रहे हो। मुर्गा लाकर तुम्हीं तो बनाया था और आधा से ज्यादा बोतल भी तुम्हीं खाली कर दिया था। अरे वह तो तुम्हारा इज्जत रखने के लिए हम और दरोगवा थोड़ा सा...
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