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२३. 😖😖 कुटिल वाणी 😖😖 @

🤓🤓 कुटिल वाणी 🤓🤓 इस जहाँ  में सिर्फ आदमी बोलता है, अपनी वाणी से कुछ लोग शहद तो कुछ लोग ज़हर घोलता है, अक्सर उनकी  बातें  बड़ी हो जाती है, उनका शख्सियत भी बड़ा  हो जाता है, वाणी में जिनकी इंसानियत बोलता है, कुछ लोगों की बातें दिल को छू जाती है, कुछ लोग अपनी जुबान से कई जख्मों पर मरहम लगा जाते हैं, कुछ की बातें आदमी तो आदमी कई कौम को तबाह कर जाते हैं, बड़ी शिद्दत से भगवान ने इंसान को बनाया है, इसी  जुबान ने कितने को हैवान बनाया  है, महाभारत का शकुनि, रामायण की  सुमिंत्रा, ये कोई गैर नही थे, जिन्होंने अपना होकर अपनों का अस्तित्व मिटाया, अक्सर हम लफ्जों के जाल में फंस जाते हैं, शातिर लोग इन्हीं लफ्जों से कई चाल चल जाते हैं, कई लोग दिल के बिल्कुल बुरे नही होते हैं, इन्हीं शातिरों  के जाल में कई घर जल जाते हैं, दुश्मन अगर करे सामने से हमला, अक्सर उसे अपनी ओकाद समझ आ जाती है, अपना बन कर जो चलाए, जुबां से कुटिल बाण, सुंदर चमन को भी वो मिटा जाती है! इनकी फितरत, इनका नज़रिया, खुद पर ना हावी होने दीजिये, अपने मस्तिष्क के अंतर...