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अप्रैल, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

व्यंग्य // आपस में लड़ रहे शिक्षक नेता, शिक्षक एकता की सबसे बड़ी पहचान है....😃😃😃

गाँव के चौपाल पर आज कुछ ज्यादा भीड़ नही थी। बनारसी काका आल्हा गा कर चौपाल पर बैठे लोगों का मनोरंजन कर रहे थे। इसी बीच अपने हल बैल के साथ किशन वहाँ से गुजर रहा था। चौपाल के पास पह...

व्यंग्य // जनता ने हड़काया तो ई.वी.एम. खराब है......😎😎😎

       गाँव के  चौपाल पर आज एक बहुत महत्वपूर्ण गरमागर्म बहस  छिड़ चुका था।  गंगुआ बड़े गुस्से में तमतमाते हुए बोला "देखो भाई ईमानदार होने  का ढोल पीटना बहुत आसान है, लेकिन सचमुच में ईमानदार होना बहुत मुश्किल है। सबसे बड़ी बात एक बेईमान आदमी के नज़र में कोई ईमानदार हो ही नही सकता है और इससे भी बड़ी बात यह है  कि दुनियाँ में अधिकांश लोग इसलिए ईमानदार बनें बैठे हैं क्योंकि उसको बईमानी का अब तक मौका ही नही मिला है।"       लठैत को भी गुस्सा आ गया, बोला "ज्यादा ज्ञान मत झाड़ो और सबसे पहले तुम्हीं बताओ कि तुम और तुम्हारा नेता लोग किस कोटि में है!!!!" गंगुआ ने लठैत को समझाया कि देखो भाई हम जानते हैं कि तुम घर से भौजाई से लड़ कर आया है और गुस्सा झुठो हम पर उतार रहा है!!!! अरे ओतने खून में ताव है तो तनी जाके मुखियाजी से लड़ो कि तुम्हारा इन्द्रा-आवास अब तक काहे नही बना है....। ऊ तो तुमसे पार लगेगा नही, बस चौपाल पर बैठ कर चार गो नेता को गरिया के अपने को बड़का शेर समझते हो!!!"       लठैत की दुखती रग पर चो...

व्यंग्य //अगर भोंपू नही होता, तो धर्मों का सत्यानाश हो जाता.....!!!

गाँव के चौपाल का जमघट आज  'दुर्गा-पूजा की तैयारी' पर चर्चा में मशगूल था। लठैत ने सबसे पहले अपनी बात रखते हुए बोला "देखिये भाई, चंदा जितना लगाना है लगा दीजिये लेकिन पूजा में अबकी ओम  डी.जे. वाला ही आयेगा। सस्ता वाला डी.जे.मंगवा कर आपलोग सब मजा खराब कर देते हैं। अरे भाई बढ़िया आवाज होगा तब ना दस गाँव का आदमी जानेगा कि हमलोग कितना बढ़िया से पूजा कर रहे हैं। इसी आवाज को सुन कर  दस आदमी आपके मेला में आता है और गाँव के लोगों का मान-सम्मान बढ़ता है। पिछले साल ई लोग सस्ता वाला लाउडस्पीकर कर  लिया, कुछ पते नही चलता था कि मंदिर में क्या हो रहा है।"      कई लड़को ने एक सुर में लठैत का समर्थन किया!!! बनारसी काका ने आपत्ति जताई, बोले "अपने गाँव में उस समय से दुर्गा-पूजा हो रहा है जब डी.जे.और लाउडस्पीकर दुनियाँ में आया भी नही था। पूजा, प्रार्थना, ध्यान, आराधना आदि के लिये शोर करने की जरूरत नही है। हमलोग पूजा तो  करेंगे ही और इस बात का भी पुरा ध्यान रखना जरूरी है कि पूजा के नाम पर फालतू शोर होने से गाँव के बूढ़ा-बुजुर्ग, बीमार-लाचार लोगों को बेवजह कष्ट नही ...

व्यंग्य // मेरा देश बदल रहा है.....😫😫😫

लठैत का गुस्सा ना जानें क्यों सातवें आसमान पर था!!! गंगुआ उसे समझाने की कोशिश कर रहा था। देख लठैत ये जो हमारे भारतीय सैनिक हैं ना वो बहुत पराक्रमी और शूरवीर हैं। इनके डर से ही  हमारे दुश्मन हम पर कभी सीधा हमला करने का दु:साहस नही करते हैं। कुछ लोग हमारे देश की शांति-व्यवस्था में दखल डालने के लिये घुसपैठ और आतंकवाद का सहारा लेते रहे हैं। कई वार हमारे राष्ट्र को इन आतंकवादियों ने गम्भीर नुकसान भी पहुँचाया है लेकिन हमारे जाबांज सैनिकों ने अपनी  जान की परवाह किये बगैर इनलोगों को मुँहतोड़ जवाब दिया है। इन्हीं सैनिकों की बदौलत हमारे देशवासी निफिक्र  हो कर शांति से रात को सोते हैं। अरे वो तो  हमारा देश एक शांतिप्रिय देश है नही तो ये सैनिक लोग दुश्मनों के घर में घुस कर उन्हें जहन्नुम पहुँचाने का पुरा काबिलियत रखते हैं। हाल ही में भूटान और पाकिस्तान में किया गया सफल सर्जिक्ल स्ट्राइक इसका सबसे बड़ा सबूत है। इसलिए पुरा भारत इन वीर सैनिकों को सलाम करता है। लठैत गुस्सा से झुंझलाते हुए "क्या मरदे, तुम कौन दुनियाँ में हो!!! यही वीर सैनिक लोग काश्मीर में जब आतंकवादियों को पकड़ने के...

व्यंग्य // अपना काम बनता भाड़ में जाये जनता : वरिष्ठ शिक्षक नेता

जेठ की दोपहर में मल्लूह काका मुखिया जी के साथ बैठ कर देश दुनियाँ की गप्प हाँक रहे थे कि तभी किशन ने चौपाल पर बैठे मल्लूह काका को टोका "ए काका, सुने मास्टर लोग हड़ताल तोड़ दिया है और  अब मेट्रिक का कॉपी मूल्यांकन भी शुरू हो गया है।" मुखिया जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया "अरे किशन, ई  हड़ताल वगेरह कुछ नही था, ई सब तो नया मास्टर को फुसलाने के लिये पूरनका  मास्टर सबका मकर्जाल था" किशन हैरत से "हम कुछ समझे नही मुखियाजी" मुखिया जी ने समझाना शुरू किया "देख किशन कल तुम्हारा बेटा गोलूवा जब खेलते खेलते गिर गया और रोने लगा  तब तुम्हारा बाबू पोता को चुपाने के लिये क्या किया था???? किशन मुखिया जी के सवाल का कुछ मतलब नही समझा, फिर भी बोला "अरे मुखिया जी आप भी एतना घुमा-फिरा कर बात करते हैं,  अरे चिन्ति काकी दरवाजा पर केला का छिलका फेक दी थी। गोलूवा भी वही दरवाजा पर खेल रहा था और केला का छिलका पर जैसे लात पड़ा गिर गया। तब बाबू जी  गोलूवा को गोद में उठा लिये और उसको  चुपाने के लिये जमीन में दो-तीन लात जोर से मार दिये, गोलूवा को लगा नीचे जमीन पर गिरने से  उसको ज...

व्यंग्य // सरकारी स्कूल के लिये सही नीति बना कर हमलोगों को अपने बाल-बच्चे का भविष्य खराब नही करना है....????

बनारसी काका किशन के साईकिल दुकान पर अपने साईकिल का पंचर  बनवा रहे थे। जेठ की दोपहर में साईकिल का टायर अगर पुराना हो तो पंचर होना आम बात है। किशन का दुकान ऐसे समय में लोगों के ...