आओ करें जनक्रांति...
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यह तरक्की हमने कैसी कर ली,
यह देश कभी नहीं था,
लालची दौलत वालों का,
दुष्टों का, शैतानों का,
संवेदना मृत हैवानों का,
सत्ता के लिए गिर चुके बेईमानों का,
इस देश का यारों दुःखद रोना,
इंसाफ की आस में तड़प रही,
दामिनी जैसी कई बहना,
रोजगार के अवसर हो रहे कम,
पूंजीपतियों का आतंक अब है सहना,
सरकारी शिक्षा हुआ पंगु,
निजी विद्यालय लूट का तम्बू,
डाक्टरों की पूजा कैसे करे भगवान,
कमीशन खोरी में जिनका बिक चुका इमान,
नेता जिनके पैरों पर गिर वोट मांगते,
जीतने के बाद उनको ही नहीं पहचानते,
चंद्रशेखर, सुभाष, बोस के आत्मा की शांति,
कर रही मांग, आओ करें जनक्रांति,
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