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राशन राशन खूब किया, राशन दिया ना कोय।
पापी नहीं कोई यहां, भाषण से पाप दिया सब धोय।।
हवाई जहाज से उड़ने वाले, महामारी का बीज दिया बोय।
थाली लोटा सबने खूब पीटा, प्रवासी मजदूर किस्मत पर रोय।।
मां की ममता तड़प उठी, छोटा बालक बेसुध सड़क पर सोय।
सोसल मीडिया पर सबने ख़ूब आंसू बहाया, मदद किया ना कोय।।
बेटा बेटी में कोई भेद नहीं, फिर भी सबकी इच्छा बेटा होय।
साईकिल क्वीन ज्योति सी हो बेटी, फिर बेटा को काहे कोई रोय।।
सब परेशान, करे एहसान, नियोजित मास्टर का सुने ना कोय।
विपदा जब भी कोई आये, सारा बोझ यही नियोजित ढोय।।
एकेज, पैकेज ख़ूब बंटा है, अन्नदाता को पूछे ना कोय।
खेती किसानी वाला माथा पीटे, हुक्कुमरान मज़े में सो य।।
सरकारी में व्यवस्था नहीं, प्राइवेट खुला मिला ना कोय,
धरती के भगवान की अजीब लीला, डोनेशन - कमिशन ही सब होय।।
कवि कविता खूब करे, मने मन गुस्सा सब होय।
पीड़ित प्रताड़ित गुस्सा करे, समाधान पल में होय ।।
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