कठघरे में ईमान
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ग़रीबी बहुत बड़ा अभिशाप है,
मजबूरी कराता अनेकों पाप है,
अपराध करना इनका शौक नहीं,
पेट की आग कराता सत्यानाश है,
रोटी की चोरी जिनके नजरों में अपराध है,
कालाबाज़री से उनका व्यापार आबाद है,
अपने गिरेबान में उन्हें झांकने की फुरसत कहां,
मिलावट व गैर कानूनी कार्य, जिनके समृद्धि का राज है,
धनवान अक्सर बहुत ज्ञानी होते हैं,
ज्ञानवान बहुत स्वाभिमानी होते हैं,
धनवानों का उपदेश इन्हें जंचता नहीं,
धनानंद से चाणक्य का कभी पटता नहीं,
विडंबना देखिए क्या से क्या हो गया,
धनवानों के पाप पर बोलना गुनाह हो गया,
उम्मीद की धुंधली आस में तड़पता जीवन,
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