सुविधावाद
----------------------------------------
विद्वानों की भीड़ यहां पर,
ज्ञान का सैलाब बह रहा,
समस्या होगा कैसे हल,
कोई कुछ नहीं कर रहा,
जिसके हाथ में दिया सत्ता,
वही बटुआ अपना भर रहा,
नीतियों से आहत आम जनता,
कुछ कहने से भी बहुत डर रहा,
समझाने की नई हुनर अाई,
घूंघट से आंख मारे लुगाई,
बिना लिए दिए काम होता नहीं,
मनाओ महोत्सव, बजाओ शहनाई,
एक ही आदर्श, एक ही धर्म,
जमकर लूटो बनकर निर्मम,
अगर टांग अड़ाए कोई सज्जन,
खिला पिला करो खूब हरि किर्तन,
करे वाद - विवाद, हो सत्यानाश,
ईमानदारों का होता खूब उपहास,
चैन की बंशी, सबसे उत्तम वाद,
बताइए रेट, अपनाएं सुविधावाद...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें