सुशासन का खुमार
---------------------------------------------
क्या सपना दिखाया था,
क्या हकीकत हमने पाया है,
रोजी रोटी पर भी अाई शामत,
ऐसा दुर्दिन आया है,
खेती किसानी में बरक्कत नहीं,
बड़ा मुश्किल करना कारोबार है,
सरकारी योजनाओं का कागजी ताजमहल,
हाथी के उदर जैसा भ्रष्टाचार है,
तकनीकी शिक्षा की समुचित व्यवस्था नहीं,
मरते बीमार, उपलब्ध चिकित्सा नहीं,
नियोजित कर्मचारी, पेंशन और भत्ता नहीं,
सरकारी निर्माण में कोई गुणवत्ता नहीं,
पंद्रह वर्षों में कल कारखाना खुला नहीं,
न जाने कैसे, कहां, कब खोलेंगे,
प्रवासियों को प्रदेश में मिलेगा रोज़गार,
यह झूठ कब तलक बोलेंगे,
किसको बताएं, किसको सुनाएं,
हमारी सुनने का कहां किसको दरकार है,
डबल इंजन की ऐसी मजबूत सरकार,
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें