*हम बिहारियों ने जिल्लत बहुत भोगा है*
✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी*
जुगनुओं की मद्धिम रोशनी में,
हमने स्वर्णिम प्रकाश देखा है,
पगडंडियों के छोटे रास्ते पर,
गौरवशाली इतिहास हमारा अनोखा है...
मां जानकी ने धर्म की राह पर,
जीवन भर वनवास भोगा है,
पत्नी के वियोग में टूटकर,
मांझी ने पहाड़ को भी तोड़ा है...
सिंहासन को पाने की खातिर,
महाभारत ने रिश्तों को बताया धोखा है,
जनकल्याण के मार्ग की तलाश में,
बिहार के बुद्ध ने राज पाठ छोड़ा है...
मज़दूरी से हमें कोई गुरेज नहीं,
मेधा का झंडा भी हमने गाड़ा है,
स्मृति शेष वाशिष्ठ नारायण सिंह,
बिहार के लाल को जगत ने पूजा है...
हमें अनपढ़ गंवार कहने वालों,
नालंदा विश्वविद्यालय को नहीं देखा है,
सभ्यता का पाठ पढ़ाने वालों,
वैशाली का प्रजातंत्र सबसे अनोखा है...
आंखें दिखा कर हमें डराने वालों,
अस्सी वर्ष के बूढ़े हड्डियों ने अंग्रेज़ो का अहंकार तोड़ा है,
राजनीति का षड्यंत्र रचने वालों,
जे पी ने तुम जैसों को कहीं का नहीं छोड़ा है...
जिसने राष्ट्र को दिया प्रथम राष्ट्रपति,
सुपर थर्टी का आनंद अनोखा है,
अवसरों और सुविधाओं से वंचित,
हम बिहारियों ने जिल्लत बहुत भोगा है...
*क्रमशः ....*
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