आधुनिक व्यापार
मैं हूं आधुनिक पत्रकार,
निकालता सबसे पहले समाचार,
डरता मुझसे है सरकार,
मेरे सामने ज्ञान मत बघार,
हो जाएगा तुरन्त एफआईआर,
लेकिन तूं डरता है बेकार,
चोथा स्तंभ आज खड़ा बीच बाज़ार,
बिकते जहां हम जैसे कुछ कलमकार,
बन जा तूं भी थोड़ा होशियार,
हम जैसे कितने बन जाएंगे चाटुकार,
हमारे आशीष से ही बनता है सरकार,
मिला लेे हाथ, मत कर समय बेकार,
समाजसेवा से बेहतर नहीं कोई व्यापार,
तेरी कृति से पट जाएगा अख़बार,
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