भेड़ियों को पहना कर खुशी से ताज,
सभी भेड़ प्रसन्न आया अपना राज,
जिस जीत पर भेड़ों को था बहुत नाज,
उसी के गोश्त ने बनाया जश्न को खास...
भेड़ों को जब तलक हुआ एहसास,
कर चुके थे वे लोग अपना सत्यानाश,
भेड़ियों का ज़ुल्म, जीवन बना मोहताज,
एक अन्तर्द्वंद सबक सिखाएंगे पांच वर्ष बाद,
वक्त बदला लेकिन बदला नहीं इतिहास,
रंग, रूप, आकार सबको सबसे ऐतराज़,
भेड़ियों ने भी बदला कुछ ऐसा अंदाज,
भेड़िया ही श्रेष्ठ, वर्ना भेड़ों को खा जाएं बाज,
टूटा सिलसिला, भेड़ों ने भी पाया ताज़,
भेड़ फ़िर भी दुःखी, आया नहीं उनका राज,
आज भी भेड़ पहले की तरह ही मोहताज,
भेड़ बन चुका है भेड़ियां, मिलते ही ताज...
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