यक्ष प्रश्न
अपनी जिम्मेदारियों से बन कर अनजान,
सरकार पर इल्ज़ाम थोपना बहुत आसान ,
संसाधन सीमित सामने अनंत व्यवधान,
कर्तव्य विमुख जनता खोजे नेता महान...
जाति धर्म के नाम पर करके मतदान,
चाय दुकान पर बैठ बांटते अमूल्य ज्ञान,
चंद सिक्कों की खनक ने खरीदा ईमान,
समस्या खुद करके खड़ी, खोजे समाधान,
खैरात के लालची भीखमंगे बहुत परेशान,
बिना परिश्रम धन की चाहत, भुगतो परिणाम,
जनता के दिए धन से राष्ट्र बनता है महान,
मूर्ख लोग खोज रहे जन धन में अपना कल्याण ...
राष्ट्रहित में स्वहित, स्वहित में जहान,
इसी भावना से ओत प्रोत किया सर्वस्व बलिदान,
आज आरक्षण की लालसा में टुकड़ों में बंटा इंसान,
नीयत दूषित, नियति प्रभावित, कैसे बनेगा भारत महान...
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