यक्ष प्रश्न, आख़िर कौन गुनहगार ?
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
पांवों के छाले, आनाज के लाले,
बच्चों की अनसुनी चीख पुकार,
गर्भवती स्त्री का भय हाहाकार,
हाथ फैलाने की आत्मग्लानि,
लाचारी, बेबसी और तिरस्कार,
यक्ष प्रश्न, आख़िर कौन गुनहगार,
मजदूर हैं, मजबूर हैं,
अपने घर से भी दूर हैं,
पसीने से रोज भींगता हूं,
ख़ून से राष्ट्र को सींचता हूं,
फिर क्यों हो रहा अत्याचार,
यक्ष प्रश्न, आखि़र कौन गुनहगार...
बहुत ज्यादा की ख्वाहिश नहीं,
सरल हम करते कोई साज़िश नहीं,
सत्ता और शक्ति मुबारक हो आपको,
नहीं चाहिए हमें कड़ोरों का व्यापार,
फिर भी हर काल में हम क्यों लाचार,
यक्ष प्रश्न, आख़िर कौन गुनाहगार...
पीड़ाएं हमारी अनंत है,
अनंत हमारी व्यथा कथा,
हिम्मत हारते कभी नहीं हम,
चाहे कितना कठिन हो रास्ता,
नियति ने किया इतना उपकार,
यक्ष प्रश्न, आखिर कौन गुनहगार,
हमने कितनों को बोलते सुना है,
बहुरेंगे हमारे भी दिन,
हमारी समस्याओं का भी होगा उपचार,
आंखे पथराई, अच्छे दिन के इंतज़ार में,
नहीं बदली सत्ता की संस्कृति व संस्कार,
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