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११. व्यर्थ सारा ज़ख़ीरा @

#व्यर्थ_सारा_जखीरा

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

बमों का जखीरा, विध्वंस का मदिरा,
संकट में सब जन हैं, सबकी यही पीड़ा,
तरक्की हमने बहुत की, फिर कैसा यह अंधेरा,
ऊर्जा किया कहां नष्ट, काम आया नहीं ज़ख़ीरा,

सामने दिख रहा सबको काल है,
सारी दुनियां में क्यों इतना बबाल है,
अदृश्य सा एक कण है, विचलित सबका मन है,
सुपर पावर भी है डरा, व्यर्थ सारा जखीरा,

भयभीत है अंतर्मन, करे करबद्ध सब निवेदन,
संकट में अस्तित्व है, सृष्टि पर खतरा बड़ा,
मानव की लोलुपता, ले रही है कठिन परीक्षा,
संयम सहयोग की तपस्या, निदान होगा समस्या,

आश्चर्यजनक अद्भुत है, मानव कितना दुष्ट है,
विपदा में सब हलकान हैं, लूटने में कुछ पहलवान हैं,
अश्रु उन्हें दिखता नहीं, आत्मा भी कांपता नहीं,
ये लोग सच में महान हैं, मृत्यु से भी सामर्थ्यवान हैं,

नाम उनके कई हैं, लेकिन उन्हीं से आस है,
किया जिसने सृष्टि का सृजन, पापियों का नाश है,
कोतुहल एक बड़ी, बड़ा मुश्किल एक सवाल है,
मौत सामने देख भी लालच की मिटती क्यों नहीं प्यास है,

अंतरात्मा से आती आवाज, नर मत हो निराश,
विध्वंस का भी होगा सर्वनाश, मानव रचेगा इतिहास,
एक नया सवेरा आयेगा, आतंक मिट जाएगा,
दूर हो जाएगा यह पीड़ा, काम न आयेगा तेरा ज़ख़ीरा

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