पंचायत चुनाव का माहौल है। सभी ओर एक अत्यंत ही उत्सवी वातावरण है। दरसअल दो दिनों बाद ही वोटिंग होना है। यही कारण है कि हर दस मिनट पर कोई ना कोई टेम्पो या रिक्शा लाउडस्पिकर से शोर मचाते हुए गांव में प्रवेश कर जाता है। देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों मेरे देश की धरती सोना उगले..., रंग दे बसंती चोला..., ए मेरे वतन के लोगों... आदि के मुखड़ों के बीच आपका भाई, शिक्षित, मिलनसार फलानां बाबू या आपके घर की शुशील, कर्मठ बहू ढेकना देवी को भारी से भारी मतों से विजयी बनावें और अपना सेवा करने का अवसर दें ...., के बाद जिंदाबाद का ज़ोरदार नारा और पीछे से बच्चों का शोर और उसके पीछे उड़ती हुई धूल...। सुबह से शाम तक उम्मीदवारों और उनके परिवारजनों, कार्यकर्ताओं का निर्बाध रूप से घर घर आने जाने का सिलसिला, बड़े बुजुर्ग को दंडवत प्रणाम करते हुए आशीर्वाद प्राप्त करने का अघोषित युद्ध, हैंडबिल और पैंपलेटों से पटा पड़ा बरामदा और सड़क पर निकलते ही धनी, सर्विस वाले, जमींदारों और महाजनों को छोड़ दें, फेंकना, जित्तन, हिरवा, मंगरू, झुनियां, मंटू, आदि मजदूर टाईप लोगों को मिलने वाला अद्भुत मान सम्मान, शाम को जगह जगह होने वाला अंगूर की बेटी के साथ मुर्गा पार्टी का भोज, देशी महुआ में झुमने वाले निम्नस्तरिय जीवन जीने को मजबुर लोगों का रासलीला आदि एक ऐसे उत्सवी माहौल का सृजन कर रहे हैं, जैसा किसी भी धार्मिक सामाजिक उत्सवों में शायद ही देखने को मिले। सभी नामांकित उम्मीदवार गांव के बड़े छोटे लोगों को खुश करने के लिए जी जान लगा रहे हैं और साथ ही दिग्गज रणनीतिकार और चाणक्य टाईप लोग गुप्त मीटिंग में जातीय समीकरण और समीकरण को ध्वस्त करने वाले पुराने आपसी विवादों के बमों के पलितों में चिंगारी लगा कर चुनाव परिणाम बदलने का मशक्कत कर रहे हैं। वांछित परिणाम आने के पश्चात बनने वाले संभावित ठेकेदारों का झुंड संक्षेप में समर्पित कार्यकर्ता गुप्तचरों की भांति पंचायत के कोने कोने में पैनी निगाह रख रहे हैं और पल पल की खबर कंट्रोल रूम तक बिना चूक पहुंचाने के लिए तत्पर हैं, वास्तव में इन्हें चुनाव होने तक वोट बैंक की ठेकेदारी सौंपी गई है और मार्केट में बढ़ती मांग के मद्देनजर ये लोग समर्पित होकर कई लोगों से ठेका ले चुके हैं, जिसका पटाक्षेप चुनाव परिणाम आने के पश्चात होना है।
इन सारे हलचलों से जानबूझकर दूर कुछ अत्यंत ही काबिल नवयुवकों की टोली गहन मगजमारी कर रहे हैं। पत्रकार जायसवाल गुस्से से तमतमा कर कहते हैं कि आज जो लोग हर शाम मुर्गे की टांग और दो हजार का स्पेशल पानी पी रहे हैं, कल यही लोग जाती, आवासीय, वृद्धा पेंशन, और अन्य आवेदन के लिए घुस लेने का शिकायत लेकर आयेंगे। मास्टर होशियार चंद के नाम से अपनी टोली में मशहूर भी तपाक से बोल उठता है कि सब आपके जैसा मूर्ख थोड़े ही है, अरे कंप्लेन लेकर आयेगा तो न्यूज़ लगाने के लिए कुछ ना कुछ दक्षिणा जरूर देगा। फिर न्यूज़ लगने के बाद मामला रफा दफा के लिए मोटा दक्षिणा का मार्ग भी वहीं से खुलेगा। क्रांतिकारी बाबा गंभीर होते हुए बोलते हैं कि ई लोग अपने आने वाला बरबादी का जश्न मना रहा है। जिससे पूछो वही घूसखोरी और भ्रष्टाचार से तंग है लेकिन तुम लोग ही बताओ कि जिसका ओरिजनल कमाई होगा वह क्या इस तरह पैसा लूटा पाएगा और बिना पैसा लुटाए कौन माय का लाल चुनाव जीतेगा जी। राय जी ने बात काटते हुए बोला कि इस तरह आपस में लड़ने से क्या आपलोग को लगता है समस्या का समाधान हो जायेगा। पटेलजी भी कहां रुकने वाले थे, गर्म होते हुए बोला कि हमको तो मन करता है कि इ जेतना फोकटिया दारू मुर्गा खा के नाच रहा है, सबको सोंटा से सोटिया दें। भगत जी ने समझाया कि बदलाव के लिए दीर्घकालीन रणनीति तैयार करना होगा। हमें सभी को जागरूक करना होगा। सबसे विवेकवान व्यक्ति ने सहमति जताया लेकिन अपने अंदर का क्रोध दबाने के लिए कुछ बोलना उचित नहीं समझा। माहौल गंभीर हो चुका था। वैद्य जी स्थिति की नजाकत समझते हुए कहा कि तों सनी खाली माथा खेभो कि खाय पिबे र भी कोय व्यवस्था होते...। पतेलजी ने भी चुटकी ली "ग्वार ख़ाली खाय र गप्प करथन और सभी खिलखिला कर हंस पड़े। उधर चाय वाले हलकू काका मन ही मन सोच रहे थे कि जिन्हें सोचना चाहिए वो लोग मौज कर रहे हैं और जिन्हें मौज करना चाहिए वो लोग सोच रहे हैं...
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