#फेसबुकिया_दान_रहस्य
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
हर चौराहे पर दानवीर खड़ा, फिर जनता काहे इतना रोय।
सेवक अगर लेबे सुधि, जनता दानवीर का करे क्यों खोज।।
अपनी दयनीय हालत पर दिन रात, गरीब आंसु बहाये रोज।
इनकी दुर्दशा का फ़ेसबुक पर, खुशी मनाये दानवीरों का फौज।।
गुप्त दान, महा कल्याण सनातन संस्कृति का पावन सोच।
सोशल मीडिया पर गरीबों का ऐसा मजाक, मानो धरती का बोझ।।
दाताओं के इस देश में दानवीर कर्ण भी बहुत लजाए।
दानदाता समाजसेवी जब, भिखारियों का हक मार खा जाए।।
मत करो मदद गरीबों का, बस करो तुम इतनी मेहरबानी।
अपनी दीनता का तस्वीर देख, उतरे ना किसी गरीब का पानी।।
हाथ को देकर उसके योग्य काम, बनाओ उसको स्वाभिमानी।
दीनता का मजाक उड़ाने वाले, दीन बड़ा और है तूं अभिमानी।।
राह चलते पैरों पर गिर, ताज तूने बड़ा यह पाया है।
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