✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी*
आजाद हमारा देश, आजाद है हिंदुस्तान,
फिर क्यों और किससे हम हैं परेशान,
हो हिंदु,मुस्लिम चाहे सीख या मुसलमान,
सब सामान, करते सब मिलकर मतदान,
बेशक मैं गलत, लेकिन बोलता सारा हिंदुस्तान,
बिना नोटों का नहीं होता, किसी टेबल पर काम,
उपर ही उपर खा जाते, फिर बनते मासूम अनजान,
अपने दिल की कोई ना पूछे, बेवजह सिस्टम बदनाम,
देश का हर युवा ईमानदार व निष्ठावान,
फेक दो उसके आगे मुर्गे का एक टांग,
रहो बेफिक्र करेगा तुम्हारा ही गुनगान,
समझो भेद आप, बन जाओगे महान,
उसके साथ हो जाए थोड़ा मदिरापान,
मस्ती में थिरकेंगे, चाहे लूट जाए जहांन,
यही इनकी समाजसेवा, इतना ही मांग,
लूट लाओ आप या हो कोई गरीब कुर्बान,
मौका का फायदा यहां सभी खूब उठाते हैं,
भरने खुद का पैकेट सिस्टम को गलत बताते हैं,
अगर जनता के प्रतिनिधी मन में लें ठान,
बेरोजगार हो कर फिर किसको करेंगे बदनाम,
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