✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
बचा ले, बचा ले, बचा ले...
घर बैठ बचा ले तू अपनी जान रे...
यहां जिंदगी के पड़े हैं लाले,
रूखा सूखा कुछ भी खा ले,
अभी बांट मत तूं अपना ज्ञान रे,
घर बैठ बचा ले तूं अपनी जान रे...
माना बरबाद तूं हुआ है,
बता आबाद कौन हो रहा है,
इतना भी तूं मत हो परेशान रे,
घर बैठ बचा ले तूं अपनी जान रे...
कहर कोरोना ने है बरपाया,
बाहर से तेरे मोहल्ले है कोई आया,
आइसोलेशन वार्ड भेजने का कर इंतिजाम रे,
होकर सतर्क बचा ले सबकी जान रे...
यहां दुनियां पर अाई है आफत,
लालच में बेच ना अपनी सराफत,
कालाबाज़री कर मत बन हैवान रे,
ले सही दाम, भला करेंगे तेरा भगवान रे,
हर घर में है नहीं पैसा,
कर मदद कोई रहे नहीं भूखा,
कुछ दिनों के लिए बन जाओ इंसान रे,
करके मदद बचा ले तू सबकी जान रे...
बाहर तो होगा ही जाना,
जरूरी सामान घर में है लाना,
भीड़ से बच मुंह पर लगा ले मास्क रे,
खुद बच बचा ले तू अपनों की जान रे...
लक्षण अगर किसी में नजर आए,
सूखी खांसी के साथ बुखार भी आए,
जल्दी से भेजो उसे अस्पताल रे,
सरकार की बातों को मानना ही मात्र समाधान है...
बचा ले, बचा ले, बचा ले...
घर बैठ बचा ले तू अपनी जान रे...
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