कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम...
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
काम तो है यूं ही बदनाम,
बहुत मुश्किल दिन रात आराम,
जिंदगी को खूबसूरत बनाता काम,
कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम...
सारी दुनिया है परेशान,
हिन्दू हो या हो मुसलमान,
सारा धर्म तेरे लिए एक समान,
कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम,
गिरफ्त में तेरे आए जो इंसान,
दूर से करता उसे हर कोई सलाम,
सोचे मूर्ख किसके लिए बेचा ईमान,
कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम,
आता नहीं है बैंक बैलेंस भी काम,
व्यर्थ हुआ गलत सही काम तमाम,
कठोर सच्चाई से रू ब रू होता इंसान,
कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम,
पड़ोसी भूखा लोग बेफिक्र खाए पकवान,
इस सोच को भी तूने बदल दिया हैवान,
कोई पड़ोसी नहीं हो संक्रमित, सब परेशान,
कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम,
मानव का हत्यारा बेशक तू बदनाम,
इंसानियत खुद भूल कर, आदमी बोले दोषी भगवान,
निज स्वार्थ में अंधा कितना गिर चुका इंसान,
कोरोना तेरा यह खूबसूरत पैग़ाम,
खोजे सब इस समस्या का समाधान,
सबको आया समझ क्यों संकट में है जान,
प्रकृति से खिलवाड़ और गलत विज्ञान,
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