बुरा ना मानो होली है, जोगीरा...
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
पलट पलट कर जिसने,
गिड़गिट को भी किया शर्मसार,
सिद्धांत गया तेल लेने,
ऐसा सुशासन का सरकार, जोगीरा ...
सरकारी खजाने पर बोझ बताकर,
वोट बैंक के लालच में किया शिक्षा का बंटाधार,
समाजसेवा गया तेल लेने,
राजनीति बन गया भाई व्यापार, जोगिरा...
देश नहीं बिकने दूंगा,
नारे से राष्ट्रवाद था गुलजार,
चौकीदार जागता रहा,
देश बेचने वाला हो गया फरार, जोगीरा...
फोर जी के द्रुतगामी स्पीड से,
एक नई क्रांति का जियो ने किया संचार,
पढ़ना लिखना भूलकर युवा,
टिक टोक पर ढूंढ रहा रोजगार, जोगीरा...
देश की बेटी अब जिंदा नहीं,
हत्यारों के फांसी का कर रही इंतिज़ार,
मां के आंखो का आंसू भी सुख गया,
होली मुबारक उनको भी जिसने सिस्टम का किया बलात्कार, जोगीरा...
मुखिया जी हैं थोड़े नाराज,
सब ओर बढ़ गया भ्रष्टाचार,
खुद की झोपड़ी बन गया महल,
छह माह में बदले अपनी कार, जोगीरा...
मास्टर सब बन बैठे नेता,
शिक्षा सुधार पर करे कौन विचार,
पढ़ने के नाम पर जिसकी मरती थी नानी,
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