हमें अपना अधिकार पाना है...
सत्ता के गलियारों में,
खोफ़ गजब का छाया है,
सम्मान करना ही होगा ग्रहण,
पटना से तानाशाही फरमान आया है...
फंड के अभाव का बना कर बहाना,
हाईकोर्ट के आदेश को भी जिसने नहीं माना,
सुप्रीम कोर्ट में जिसने बुना गजब का ताना-बाना,
शिक्षक एकता की ताकत हमें है उनको दिखाना...
समान कार्य का समान वेतन,
हमारा नैतिक और न्यायिक अधिकार है,
शोषण और दमन है जिनका मकसद,
ऐसी सरकार को धिक्कार है...
हमें डराने का यह प्रयास बहुत अच्छा है,
बाजू-ए-कातिल को आजमाने की हमारी भी इच्छा है,
बहरी गूंगी सरकार के होश ठिकाने लाना है,
अपने सम्मान के लिए हमें हर हाल में पटना जाना है...
मार्गदर्शन करने का जिसने भार उठाया है,
नियोजन के कलंक से सरकार ने उसे सताया है,
इस कलंक को हमें अब हर हाल में मिटाना है,
क्रांति की आग से प्रकाश का दीपक जलाना है...
बिना सेवा शर्त के हम सेवा कर रहे हैं,
भविष्य अंधकार में फिर भी हम डर रहे हैं,
इस हालात को अब हमें हर हाल में बदलना होगा,
कदम से कदम मिलाकर हर शिक्षक साथी को चलना होगा...
गद्दारी करने वाले आंख नहीं मिला पाओगे,
आंदोलन के बगैर अपना हक नहीं पाओगे,
चाणक्य के वंशजों को अपना संस्कार दिखाना है,
अपनी एकता के दम पर हमें अपना अधिकार पाना है...
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