नेताओं का चालान कब करेगी सरकार...
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
बड़ी उम्मीदो से बनाया था हमने एक सरकार,
रही आज भी वह पुराने लोगों को धिक्कार,
राजनीति की पाठशाला पर किया आपने बड़ा उपकार,
लोकतंत्र ने सीखा कैसे किया जाता प्रतिद्वंद्वियों पर वार ...
आलोचना करने वाले हुए सबसे बड़े गुनाहगार,
आपकी शरण में जो आ जाए वह सबसे बड़ा ईमानदार,
लोकतंत्र की नई परिभाषा से किंकर्तव्यविमूढ़ है संसार,
भक्ति की पराकाष्ठा बन गई है राजनीति का व्यापार,
प्रशंसा कर सकते हैं हम नहीं मांग सकते रोजगार,
टैक्स में कोई रियायत नहीं चाहे मंदी से पीड़ित हो व्यापार,
सरकारी कर्मियों को नहीं उचित वेतन और पेंशन का अधिकार,
इतने अच्छे दिन आ गए फिर क्यों न करें हम आप की जय जयकार...
सत्ता में आने से पहले वादों का था गरम बाजार,
काले धन की वापसी से संवरेगा हर भारतीय का संसार,
ना खाऊंगा ना खाने दूंगा खत्म होगा भ्रष्टाचार,
भक्तों यह भी तो बताओ कहां होता बिना रिश्वत गरीबों का उपकार...
अच्छे दिन के सुनहरे सपने में सह ली नोट बंदी की मार,
GST और कागजों की खानापूर्ति में उलझा व्यापार,
चालान के तिक्रमबाजी से भयभीत खरीद ली साइकिल बेचकर कार,
वादों से पलटने वाले नेताओं का चालान कब करेगी यह सरकार...
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