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रोजगार चाहिये

रोजगार चाहिये

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

भावनात्मक मुद्दों में उलझा कर,
बनी है बहुमत की सरकार,
अर्थव्यवस्था पानी मांग रही है,
संकट में रोजी रोटी और कारोबार ...

देश क़ी अखंडता हमें जान से प्यारी है,
इसके लिये कुर्बान यह जान हमारी है,
इसकी सुरक्षा करने वाली सरकार चाहिये,
फांसी पर लटका हिंद का हरेक गद्दार चाहिये,

बड़ी शिद्दत से डिग्रियां हमनें भी बटोरी हैं,
मेरे सपनों क़ी उड़ान के लिये अपनों क़ी आँखे रोयी है,
हमारे घर का चूल्हा भी इज्जत से जलता रहे,
हर युवा को उसकी दक्षता के अनुसार रोजगार चाहिये..

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