कुत्तानियत
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
कुत्तों की महफिल में सरदार ने फरमाया,
इंसानों को काटना अब हमने छोड़ दिया है,
एक दूसरे को काटने के लिए इंसान ही काफी हैं,
अपनी बिरादरी के सारे रिकार्ड को भी तोड़ दिया है...
हमारी वफादारी के आजकल बहुत चर्चे हैं,
इतना मुकम्मल मुकाम हमने हासिल कर लिया है,
इंसानों पर नहीं किसी का कोई भरोसा है,
इंसानी वफादारी ने शायद आत्महया कर लिया है ...
संगति का असर नहीं खुद पर हमें आने देना है,
हम कुत्तों से ख़तरनाक आजकल ये इंसान हैं,
विकट परिस्थिति में भी नहीं बेचते हम अपना ईमान हैं,
बदलते वक्त में भी हमारी ख़ास पहचान है,
नमक खा कर हम कर्ज अदा करते हैं,
मौत हो सामने फ़िर भी नहीं डरते हैं,
इंसानों के कमिनेपन का असर नहीं होना चाहिए,
हम कुत्तों को कुत्ता बन कर जीना चाहिए ...
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