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१८. अनोखा आशियाना @

अनोखा आशियाना

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

तिनके तिनके को जोड़ कर हमने आशियाना बनाया है,
वहां बनाया है जहां पहले किसी ने नहीं बनाया है,
दुनिया की नजरों में मैं बेशक पागल हो सकता हूं,
इन्हीं पागलों की जमात ने मुझे पागल बनाया है...

पंख है आसमान में उड़ सकता हूं,
सुरक्षित आशियाने की जगह ढूंढ सकता हूं,
क्या करूं यह धरा वीरान हो गया है,
बुद्धिमानों का जमात हैवान हो गया है...

ऊंची ऊंची अट्टालिकाओं की हमें चाहत नहीं है,
हम जैसे कितने विलुप्त हो गए लेकिन कोई आहत नहीं है,
इन पागलों का नाश निकट अब आया है,
महत्वाकांक्षा में मानवता ने बस इतना ही पाया है...

प्रकृति की गोद में चहक हम परिंदे खुश हैं,
हमारा किसी से यहां कोई बैर नहीं है,
हमारी दुर्गति देख आप अब भी सचेत नहीं हुए,
यकीन मानो मानवता की ख़ैर नहीं है...

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