*ठा न लो हम शिक्षकों को पटना है जाना*
कुछ लोग यहां हैं डरे हुए,
कुछ है बिल्कुल मौन पड़ें,
अपने हक हकूक की लड़ाई है,
क्यों हो भाई तुम दूर खड़े...
सबको ज्ञान हम देते हैं,
हमें ज्ञान यहां कौन देगा,
जिम्मेदारी से हम भाग गए,
फिर हमें सम्मान कौन देगा....
गूंगी बहरी यह जो सरकार है,
नियोजन के नाम पर करती खिलवाड़ है,
संघर्ष जिंदा लोगों का संस्कार है,
आंदोलन ही हम शिक्षकों का अंतिम हथियार है...
संघर्ष समन्वय समिति ने किया आह्वान है,
पटना की धरती पर करना घमासान है,
सत्ता लोभियों के कुर्सी की नींव हिल जाए,
अपने आंदोलन को हमें बनाना इतना महान है...
शिक्षक दिवस को हम ऐसा अलख़ जलाएंगे,
शिक्षक एकता को देख कुर्सी कुमार तानाशाही भूल जाएंगे,
इसलिए अबकी बार तुम कोई बहाना नहीं बनाना,
ठान लो हर परिस्थिति में हम शिक्षकों पटना है जाना...
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