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व्यंग्य // कौन संविधान कहता है कि हम गंदगी नही फैला सकते हैं.....????

मल्लूह काका चौपाल पर अपना राजनीतिक ज्ञान झाड़ रहे थे "बोले ए भाई भारत जैसा इतना बड़ा देश में सरकार और सरकारी कर्मचारी को कोई काम नही है, क्या ??? साला सब लोग एगो झाड़ू ले कर जमा हो जाता है, और कभी सड़क पर झाड़ू लगाने लगेगा, कभी स्कूल के मैदान में, कभी स्टेशन पर ,  कभी कौनो मंदिर केम्पस में, कभी किसी नदी घाट पर, कभी कौनो सरकारी कार्यालय में!!! ई अजीब नौटंकी है भाई। अरे जिसका जो काम है वही अगर मन से कर दो तो देश का झमाझम विकास हो जायेगा। अब आप ही बताईये मुखिया जी ई दरोगा साहब का काम है झाड़ू लगाना, अरे मरदे का दरोगा, का बी.डी.ओ. , का सी.ओ. , का एस.पी., का डी. एम., एतने समझ लीजिये कि एगो संतरी से लेकर बड़का से बड़का मंत्री तक सबका वही हाल है!!!!"

       मुखिया जी ने सहमति जताते हुए बोला कि एकदम ठीक बोलते हैं मल्लूह जी!!!! अरे ई कोई तरीका है कि सब लोग मिल के सड़क पर झाड़ू लगाईये और बड़का-बड़का फोटो अखबार में छपवा कर फोकटिया वाहवाही लूटिये!!! इससे देश और पब्लिक का कौन सा भला होगा ??? आज तक हमको समझ नही आया। अरे भाई सब लोग का अपना काम है, अपना काम तो ढंग से निपटाया पार नही लगता। सारा दिन ऑफिस में पान और रजनीगंधा चबा कर कुर्सी के बगल में ही थूक देंगे और फोटो खिंचाने के लिये खूब बढ़िया कपड़ा पहन कर सफाई करने का नौटंकी करेंगे।"
लठैत भी कहाँ चुप रहने वाला था। बोला जानते हैं जिस जगह ई लोग सफाई का नाटक करता है, आप अगले दिन अगर वहाँ चले जाइये तो आपको सब दिन से ज्यादा वही  जगह गंदा दीखाई पड़ेगा। कहीं नाश्ता का जूठा पॉकेट... कहीं पानी का बोतल.... कहीं खाना का थैली.... अरे मत पूछिये देख के मन भिनक जायेगा। मन करेगा कि साला ई लोग अगर कल झाड़ू पकड़ के यहाँ सफाई नही करता तो आज यहाँ एतना गंदा नही रहता।

मुखिया जी ने ठहाका लगाते हुए बोला "बिल्कुल सही बोल रहा है लठैत!!! एक बार तो हम ब्लॉक के चपरासी मैकू को इसी बात पर डांटे तो जानता है मैकूवा क्या बोला??? बोला क्या करे मुखिया जी कल हम खूब बढ़िया से सफाई किये थे, लेकिन साहब लोग खूब डाँटने लगे!!!! हमको बोले अरे मूर्ख-गंवार जब पुरा ब्लॉक जानता है कि यहाँ आज विधायक जी "स्वच्छ भारत अभियान" का प्रोग्राम करने वाले हैं तो एतना सफाई करने का क्या ज़रूरत था??? आगे मैकूवा बताया कि कुछ साहब लोग तुरंत बहरना फेकने वाला  टोकरी ले कर गया और जहाँ हम कचरा फेंक कर आये थे, वहाँ से भर टोकरी कचरा उठा के ले आया और पुरा ऑफिस में छिरिया दिया। मैकू बोला क्या बताये मुखियाजी हमको तो कुछो समझ में नही आ रहा था कि तभी विधायक जी बीस-पच्चीस आदमी के साथ  अप्पन गाड़ी से उतरे!!!! सबके हाथ में एकदम नया-नया झाड़ू था। ऊ लोग के साथ मिल कर ऑफिस का सबलोग पुरा ऑफिस में झाड़ू लगाया, अरे ऑफिस क्या सड़क और ई आगे वाला मैदान में भी सब मिलकर खूब झाड़ू लगाया, हमको तो अंदर से बड़ा खुशी हो रहा था।
मुखिया जी ने आगे बताया कि जब मैकूवा से पूछे कि तुम  काहे खुश था रे लंपट तो जानता है लठैत, मैकूवा  क्या बोला ??? बोला कि अरे मुखिया जी ई सामने वाला मैदान में हजारों आदमी सुबह-सुबह लोटा ले कर जाता है। ऐसन जगह पर तो हम भी झाड़ू नही लगायेंगे जहाँ कल ब्लॉक के सब बाबू लोग झाड़ू लगाया है। मैकूवा खुशी से झूमते हुए बोला कि सच मुखिया जी हमको तो कल लगा रहा था कि केकरो अच्छा दिन आया हो ना आया हो, ऑफिस में  झाड़ू-बहारू करने वाला का अच्छा दिन तो जरूर आ गाया है और इसके लिय हम मोदी जी के दिल से शुक्रिया देते हैं। लेकिन साला आज हम जान कर लेट आये तो देखे कि ऑफिस सब दिन से ज्यादा गंदा है और ऑफिस में झाड़ू लगाने के लिये भी कोई तैयार नही है। अभी बड़ा बाबू मिले तो बड़ा बेशर्म के तरह पान का पीक फेंकते हुए बोले, कि का रे मैकूवा एतना लेट आयेगा तो ऑफिस का सफाई का तुम्हारा बाप करेगा???

         मैकूवा बोला कि "हम बड़ा बाबू को बातायें कि हम्मर बाबू जी तो मर गये हैं।"
तो बड़ा बाबू और गुस्सा कर बोले कि अरे मर तो साला कल हमलोग गये, ई स्वच्छ भारत अभियान के चक्कर में साला कौन-कौन आदमी के सुबह वाला गंदा हमलोग साफ किये हैं। कल से ई खाना भी नही धँस रहा है, और तुम्हारा तो फुटानि अलगे बढ़ गया है, जा के जल्दी से सफाई करो और सब लोगों को समझा देना कि कल से सामने वाला मैदान में लोटा ले कर नही जायेगा!!! क्या पता फिर कौन दिन सांसद साहब का प्रोग्राम हो जाये और फिर सबका सुबह वाला गंदा फिर से साफ करना पड़ जाये!!!
इतना सुनते ही चौपाल पर बैठे सभी लोग खिलखिला कर हँस पड़े।
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गंगुआ ने सबकी  हँसी रुकते ही बोला  "और ई बाबू लोग गरीब आदमी का शौचालय वाला पैसा घूस के चक्कर में दबा कर रखे। एकदम मोदी जी सही किये हैं। अरे भाई जब गरीब लोगों का शौचालय बाबू लोग नही बनने देगा तो गरीब लोग मैदान में जायेगा ही, अब स्वच्छ भारत अभियान के बहाना ही सही, बाबू लोग जब गरीब आदमी के सुबह वाला गंदा सड़क और मैदान पर साफ करेंगे तो ई लोग घूम-घूम के गरीब आदमी का शौचालय जरूर बनवायेगा।

और एक बार फिर से चौपाल पर हँसी का फव्वारा फूटने लगा
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बनारसी काका सबकी बात सुन रहे थे। बोले "अरे भाई मोदी जी तो गंदगी के विरुद्ध जागरूकता अभियान लाना चाहते हैं लेकिन सरकारी मशीनरी का आदत ही खराब है। सरकार कितना भी बढ़िया योजना ले कर आये, उसका मजाक बनवा कर रख देता है। काम जमीन पर हो या नही हो बस कागज पर काम हो जाना चाहिये। यही अपने देश का दुर्भाग्य है।
गंगुआ ने बनारसी काका के सुर में सुर मिला कर बोला कि बिल्कुल सही बनारसी काका, सफाई हर आदमी का  कर्तव्य है। इससे ना सिर्फ आदमी स्वस्थ रहता है बल्कि स्वस्थ रह कर डाक्टर के चक्कर में नही पड़ने से हमारा पैसा भी बचता है। शास्त्र भी कहता है कि जहाँ सफाई रहता है वहीं  भगवान भी वास करते हैं।
तभी मन्ती काकी पूजा की थाली ले कर मंदिर की ओर जा रही थी।
मल्लूह काका ने टोका "का भौजी तुम्हारा बकरी मंदिर का पुरा बरामदा भेनारी से घिना दिया है, पहले उसको साफ तो करो तब भोला बाबा का पूजा करना!!!"
मन्ती काकी का पूजा के समय मल्लूह काका का इस तरह  टोकना ठीक नही लगा, गुस्सा से बोली हम कौनो तोहार गुलाम नही हैं। थोड़ा बातचीत तमीज से किया करो। नही तो अप्पन बेट्वा किशन को बोल कर हाथ-पाँव तोड़वा देंगे। मन्ती काकी ये बोल कर तो चली गयी लेकिन चौपाल पर सन्नाटा छा गया।

काफी देर बाद बनारसी काका बोले इस देश में लोग आजादी के नाम पर क्या-क्या नही कर रहे हैं। कोई अपने घर का सारा कचरा सुबह में सड़क पर फेक रहा है। सड़क पर घर के बच्चों से लोग शौच करा रहे हैं। घर का गंदा पानी खुले में बहा कर जहरीला मच्छर-मक्खी  को फैला रहे हैं। पिकनिक मनाने जायेंगे तो ट्रेन-स्टेशन से लेकर पर्यटनस्थल को कूड़ा का अड्डा बना रहे हैं। इसी  गंदगी के कारण ही देश के लोग अनेकों भयानक बीमारी का शिकार हो कर सरकारी हॉस्पिटल की व्यवस्था को नष्ट कर रहे हैं। खुद तो गंदगी फैलाने की आदत सुधारेँगे नही और बोलेंगे सरकार नही सुधरने वाली है।

तभी लठैत बोला "इसका मतलब योगी जी मुख्यमंत्री बनते ही सरकारी ऑफिस में पान-गुटका खाने पर पाबंदी लगा कर सही किये हैं"
गंगुआ ने समझाया "हाँ रे लठैत, योगीजी भी ठीक किये हैं और मोदीजी भी ठीक किये हैं लेकिन जब तक एक एक देशवासी सफाई के लिये अपने स्तर से प्रयास नही करेगा तो इस देश में किसी सरकारी योजना से सफाई का कुछ नही होने वाला है"

तभी मन्ती काकी पूजा करके लौट रही थी। उन्हें देखते ही मल्लूह काका बोले कि यही बात अगर अभी तुम मन्ती भौजी को समझाने जाओ तो उल्टे तुमसे पूछेगी कि ढेर पढ़ लिया है, बताओ भारत का कौन सा संविधान कहता है कि हम गंदगी नही फैला सकते.....????????

   -बिपिन कुमार चौधरी

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