मल्लूह काका विश्व का नम्बर वन अखबार "दैनिक जागरण" पढ़ रहे थे। सात अप्रैल 2017 का पुराना अखबार था, तभी गँगुआ बगल से गुजरा बोला "ए मल्लूह काका, क्या आप पुराना अखबार पढ़ रहे हैं। कल हम ही तो फेंक के गये थे।
मल्लूह काका ने डाँटते हुए बोला "धत्त बुरबक , अखबार पुराना है तो क्या हुआ, न्यूज़ देखता नही है कितना नया है!!!!"
लठैत भी वहीं खड़ा था "बोला का हुआ हो मल्लूह काका आठ महीना से जो हमलोग का ट्रांसफार्मर गाँव वाला खराब है, ऊ ठीक होने वाला है क्या ??? साला फेंकना और ओकर माय ढेर दिन से टी.बी. नही देख पाया है!!!! हम भी डी.डी.वन पर फिल्म और रंगोली देखते थे। सबका सत्यानाश हो गया है!!!!
गँगुआ ने लठैत को डांटा "भक्क बुरबक, हम्मर मोबाइल चार्ज के बगेर खराब हो गया और तुमको रंगोली और फिल्म सूझता है। अरे कितना शौक से मोबाइल लिये थे लेकिन जब से ट्रांसफार्मर खराब हुआ है बच्चा के खेलने वाला खिलौना बन कर रह गया है। शुरू में दो-चार दिन मुखिया जी के यहाँ जेनेटर पर चार्ज करने गये तो एक दिन मुखियाइन गुस्सा कर बोली कि का रे गँगुआ रोज़-रोज़ कौन तमाशा लगा के रख दिया है। जेनेटर में डीजल जलता है। मोबाइल चार्ज करना है तो रोज़ बीस रुपया देना होगा!!!
हम्मर मेहरारू मुखियाइन से झगड़ा करने चल गयी, जा कर बोली का हो मुखियाइन तनको शर्म नही आता है जो अप्पन जेनेटर के डीजल का सब खर्चा मोबाइल चार्ज करे वाला से वसूलना चाहती हो!!!! तब जानता है लठैत, मुखियाइन क्या बोली??? बोली कि एतना दाम का जेनेटर पूरे गाँव का मोबाइल चार्ज करने के लिये मुखिया जी नही खरीदे हैं। जेनेटर चलता है तो खाली डीजल ही नही जलता है, उसका इंजन भी खीयाता है, उसका चार्ज के देगा???
क्या बातायें मल्लूह काका!!!! हमार मेहरारू को एतना गुस्सा आया कि घर आ कर मोबाइल हम्मर सामने में पटक दी। मेरा तो सब अरमान ही ख़त्म हो गया !!!!"
एतना सुनते ही सबके मुँह से अनायास ही ठहाका निकल पड़ा.....
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मल्लूह काका ने सबको चुप करते हुए बोला "अरे ई एकदम नया न्यूज़ हम आज पढ़ रहे हैं। सरकार अब होल्डिंग टेक्स चोरी रोकने के लिये नगर विकास एवं आवास विभाग को निर्देश दिया है कि होल्डिंग टेक्स वसूलने में बिजली बिल को आधार बनाये। दरअसल नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्र में व्यापारी लोग होल्डिंग टेक्स घरेलू दर से चुकाता है लेकिन बिजली बिल शहरी दर से....। अब इस कानून से जो भी व्यापरी आवासीय परिसर में दुकान चलायेगा, ऊ लोग का अब खैर नही है। इस कानून को लागू करने का आदेश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद ही दिये हैं......।
नीतीश कुमार का नाम सुनते ही गँगुआ को गुस्सा आ गया, बोला "यही सुशासन बाबू पंद्रह अगस्त 2012 को गाँधी मैदान में बोले थे कि जब तक बिहार के प्रत्येक गाँव में बिजली नही पहुँच जायेगा, मैं बिहार की जनता से वोट नही माँगुगा। बिजली तो नही पहुँचा, वोट माँगे खातिर फुल में तीर मार कर लालटेन से दोस्ती कर लिये। जब लोग के शहर में भी शहर के तरह बिजली नही मिलेगा तो होल्डिंग-टेक्स और शहरी रेट से बिजली बिल का भुगतान करने के लिये सुशासन बाबू कौन मुँह से बोलते हैं।
लठैत गँगुआ से बोला , अब एक बात जानता है सरकार जो है बिजली नियम से दे या नही दे बिल सख्ती से वसूलने के लिये प्राइवेट कम्पनी को लगा दिया है। सरकार का कहना है कि शहर में कम से कम अठारह घंटा और गाँव में बारह से चौदह घंटा बिजली देंगे। साथ ही कोई भी ट्रांसफार्मर अगर खराब होता है तो बहत्तर घंटा के अंदर ठीक करवायेंगे। अगर सरकार ऐसा करने में असफल हो जाती है तो बिजली बिल किस चीज़ का....। लेकिन तुम देखो आठ महीना से ट्रांसफार्मर खराब है, उसके बारे में पूछने वाला कोई नही है लेकिन बिजली बिल हर महिने एकदम टाईम से फाइन जोड़ कर प्राइवेट कम्पनी वाला भेज देता है।
तभी उधर से गाँव के स्कूल का हेड मास्टर शुशील बाबू गुजर रहे थे। उनलोगों की बात सुन कर बोले कि अरे का बातायें आपलोग को स्कूल में आठ गो कंप्यूटर भेज दिया है और बिजली का ठिकाना ही नही है। सब कंप्यूटर में रखले-रखले जंग लग जायेगा तो सरकार हमसे स्पष्टीकरण मांगेगी। इधर गाँव का लड़का सब अलगे कंप्यूटर सीखने के लिये माथा खाये रहता है। अरे शाम में उत्प्रेरण केंद्र का बच्चा जो लालटेन जला कर पढ़ता है उसका पैसा तो सरकार देती ही नही है और ई लोग जेनेटर जला कर कंप्यूटर चलाने बोलता है। हम करें तो क्या करें। साला मास्टर तो हर तरफ़ से जाता है.....!!!
बनारसी काका ने शुशील बाबू को समझाया "अरे आपका तो सरकारी समान है, हम जो एतना महँगा बिजली वाला मोटर और पम्प सेट लाये हैं उसका का होगा सोच-सोच कर दिमाग खराब है। बिजली अगर समय से मिले तो देश के कितना किसान आत्महत्या नही करेगा।
तभी गँगुआ बोला "देखिये बिजली नही मिल पाने में सिर्फ सरकार का ही दोष नही है। अपने गाँव में ही जितना कन्जूमर है उससे ज्यादा तो चोरी से जलाने वाला है। अब लठैत को ही देखिये जब तक लाइन रहेगा इसका टी.बी. बल्ब और पंखा बंद होता ही नही है।"
लठैत ने बीच में टोका कि "अरे स्विच खराब है...., तुमको कितना बार समझाये हैं!!!"
मल्लूह काका ने सबको डाँटते हुए बोला कि अपना-अपना गलती तो कोई मानोगे नही। बिजली आयेगा तो भर-मन बरबाद करोगे लेकिन नही आयेगा तो सरकार को दोष दोगे। अरे भाई सरकार बिजली पर बहुत पैसा सब्सिडी देती है। सरकार तुमसे बिजली का कीमत थोड़े लेती है, ऊ तो तुम्हारे घर के पास पोल और तार जो लटक रहा है उसी का हर महिने बिल आता है। अब रहा बात ट्रांसफार्मर ठीक कराने का तो गाँव का सब लोग दो-दो सो चंदा लगा कर मेरे पास जमा करो, देखो हम अपना पैरवी से काम कराते हैं कि नही.....!!!!
- बिपिन कुमार चौधरी
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