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व्यंग्य // हमारे देश को सिर्फ दुआओं की ज़रूरत है, दवाओं की नही.......!!!!

गाँव के चौपाल पर बड़ी भीड़ लगी हुई थी। हर कोई हाथ जोड़कर बाबा की कृपा पाने को लालायित थे। क्या महिला, क्या बूढे, क्या जवान और तो और गाँव के बच्चे भी इतनी श्रद्धा से बाबा के प्रवचन सुन रहे थे मानो बाबा की अनुकम्पा से आज सबकी सारी मुराद पूरी होने ही वाली थी। बाबा का भेष-भूषा भी कुछ ऐसा था जो उनके दिव्य होने का साक्षात अनुभव करवा रहा था। बाबा के बाल जैसे वर्षों से उसे साबुन-सेम्पू का दर्शन नही हुआ हो, उसकी लम्बी-लम्बी जटायें जैसे गंगा माँ अभी कुछ देर में ही उनकी जटा से गाँव में अवतरित होने वाला हो। ललाट पर लाल-काला-सफेद पेंट उनकी मुखाकृति को एक खास तेज प्रदान कर रहा था। शरीर से एक खास खुशबू आ रही थी लेकिन ना जाने क्यों गाँव की छोटी लड़कियां उनके समीप जाते ही नाक पर हाथ रख कर भौं सिकोड़ने लगती थी। ये अलग बात है कि गाँव की बूढ़ी महिलाएँ इसे बाबा का अपमान समझ कर बच्चों को ऐसा ना करने के लिये डाँट रही थी। दरअसल गाँव के लगभग हर तबके के लोग इस  भक्तिमय माहौल में भाव-विभोर हो कर बाबा के एक-एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे!!! मानो आज पुरा गाँव का कायापलट और समूल उद्धार होने ही वाला था।

         दूसरी ओर गँगुआ की माँ घर के एक कोने में खाट पर तेज ज्वर और सिर के भयानक दर्द से तड़प रही थी। घर का कोई भी आदमी उनकी सेवा के लिये घर पर नही था। पिछले ढाई घंटे से उसे पानी की तलब महसूस हो रही थी, लेकिन बेहद कमजोरी के कारण वो बाबा के कार्यक्रम से उसके बहु बच्चे के वापस लौटने की बाट जोह रही थी। इस सबके बावजूद बुढिया को सबसे ज्यादा दुख इस बात का था कि जरूर उसने भुले-भटके कोई ऐसी बड़ी गलती की होगी, जो उसे आज इतना बड़ा दुर्दिन देखना पड़ रहा है। भेरौ बाबा का इतना बड़ा भक्त "अघोरा बाबा" उसके गाँव में उपदेश दे रहे हैं लेकिन वो बिछावन से भी नही उठ पा रही है। यही सोच-सोच कर उसे और भी ग्लानि हो रही थी और वो शर्मिंदगी से अंदर ही अंदर घुले जा रही थी। दूसरी और बाबा गाँव की सभी समस्याओं की जड़ शैतानी शक्ति को बता रहे थे और जो भी बीमार उनके पास इलाज को पहुँचते, अघोरा बाबा सबसे पहले अपने हाथ में स्थित जादुई झाड़ू से उनका जम कर धुलाई करते थे। कई बार तो कुछ बीमार लोग वहीं पर बदहवास हो कर गिड़गिड़ाने लगता, तब बाबा बोलते कि देखो गाँव वालों मेरे डर से शैतान गिड़गिड़ा रहा है और फिर तो बाबा का गुस्सा भी सातवें आसमान पर चला जाता और जम कर वो उसकी धुलाई करते थे। तब शैतान डर कर उड़न-छू हो जाता!!! हाँ कुछ देर के लिये वो बीमार आदमी बेहोश हो कर नीचे जमीन पर धम्म् से निस्तेज पड़ जाता तो बाबा उसे भूत-भभूत मल कर कुछ देर में खड़ा कर देते और फिर कराहता हुआ वो अपने परिजन के साथ अपने घर चला जाता था। उनके तत्काल चमत्कार करने के कारण ही इलाके के लोगों को उन पर बहुत ज्यादा भरोसा था।
    
         इसी बीच गँगुआ का बेटा कुंदन दौड़ते हुए आ कर मुखिया जी को बोला ए दादा, दादी कुछ नही बोल रही है!!!! फिर क्या सबलोग बाबा को साथ लेकर गँगुआ के घर दौड़ पड़े!!! वहाँ गँगुआ की पत्नी जोर-जोर से दहाड़ मार कर रो रही थी!!! अघोरा बाबा ने बुढिया को देखते ही बोले राहु की काली दृष्टि और शनि के प्रभाव के साथ काली भूतनी ने भी अपना जादू चला रखा है!!!! गँगुआ की पत्नी बाबा के पैरों में गिरते हुए बोली कृपा करो महराज !!! बाबा ने पहले तो ना-नुक्कड़ किया लेकिन मुखिया जी के आग्रह पर बोले मैं प्रयास करता हूँ, हालांकि अब बहुत लेट हो चूका है!!! फिर तो उसने अपने झाड़ू से बुढिया कि ऐसी धुलाई की, कि पूछो मत!!!!! लेकिन काली भूतनी का असर जब कम नही हुआ तो अघोरा बाबा ने एक-दो बार उसे खाट पर ही उठा कर पटक दिया लेकिन सब बेकार!!! बाद में बाबा ने निराश हो कर कहा, माताजी को भैरो बाबा ने अपनी सेवा में बुला लिया है!!! वो तो गनीमत है कि मैं इस गाँव में था वर्ना ये काली भूतनी की छाया में पूरे गाँव को तबाह कर देती!!!! मैंने काली भूतनी और राहु का असर समाप्त कर दिया है लेकिन भैरो बाबा ने इसे अपना दासी बना लिया है!!! सबलोग अघोरा बाबा का जयजयकार करने लगे!!! कुछ देर में ही मुखीयाजी के आदेश से अर्थी उठाने की तैयारी होने लगी....

तभी गँगुआ अपने मित्र लठैत के साथ उसकी पत्नी को टेम्पो में लेकर गाँव पहुँचता है। ये लोग शहर के सरकारी हॉस्पिटल से लठैत की पत्नी जो माँ बनने वाली थी का चेक-अप करा कर लौट रहे थे। आते ही लठैत मुखियाजी से बोला कि मुखीयाजी दो रोटी कम खाना चाहिये लेकिन बाल बच्चा को जरूर पढ़ाना चाहिये। आज गँगुगा पढ़ा-लिखा है तब ना डाक्टर से ऐतना ढंग से बात कर लिया और फ्री में हमको दवाई भी दिला दिया और अपनी माँ के लिये भी दवाई ले कर आया है। हमसे तो साला कम्पोन्डरवा हमेशा पैसा ठग लेता है।
मुखीयाजी अभी कुछ नही बोल पाये थे कि अंदर से गँगुआ की पत्नी के रोने की आवाज़ आई। फिर तो गँगुआ और लठैत सरपट दौड़ा, लेकिन वहाँ का दृश्य देख कर दोनों के पाँव तले जमीन खिसक गयी। गँगुआ की पत्नी ने रो-रो कर सारा वृतांत गँगुआ को सुना दिया!!!!  गँगुआ पहले तो खूब रोया फिर जोर से चिल्लाया कि अरे हम अघोरा का मर्डर कर देंगे!!!! ऊ हम्मर माय का जान ले लिया हो बाबू, जान ले लिया!!!
ऐतना सुनते ही चारो ओर खलबली मच गयी!!! सबने गँगुआ को खूब उल्टा सीधा कहा !!!

मुखीयजी आग बबूला हो कर बोले "रे गँगुआ, तुम्हारा बुद्धि भ्रष्ट हो गया है!!! या तुम थोड़ा सा शहर में पढ़ कर पगला गया है जो अघोरा बाबा के बारे में अनाफ-सनाफ बोल रहा है!!! अगर अघोरा बाबा गुस्सा गये तो पुरा गाँव का नाश हो जायेगा !!!!
गँगुआ गुस्सा से "चुप मरदे !!! बड़ा मुखिया बनता है !!!! हर हमेशा कोई ना कोई पूजा का चंदा के लिये ढोल पिटवा देता है लेकिन ई कभी नही हुआ कि गाँव में चंदा माँग के ही एगो अस्पताल खुलवा दें। चंदा के पैसा का तुम अप्पन चमचा-बेलचा के साथ किस प्रकार बंदरबांट करता है, सब हमको पता है। जब मेरी माँ कमजोर और बीमार थी तो अघोरा उसको पीटा काहे.... और पीटने पर जब ऊ बेहोश हो गयी तो खाट पर पटक के जान ले लिया.....!!!

चारों ओर सन्नाटा छाया हुआ था कि तभी लठैत बोला "गँगुआ बिल्कुल सही बोलता है॥ साला एक-एक गाँव में छः - छः मंदिर-मस्जिद मिल जायेगा लेकिन छः गाँव में एगो अस्पताल खोजने पर नही मिलता है। अरे मुखीयाजी मंदिर के दुआ भी तभी काम करता है जब बीमार लोग को सही दवा मिलता है।। लेकिन आपलोग और इस देश का बड़ा महान नेता लोग अस्पताल-स्कूल का बात तो कम करेंगे लेकिन मंदिर-मस्जिद पर हल्ला बहुत करेंगे। सरकारी अस्पताल में सही से दवाई मौजूद नही लेकिन कोई बोलने वाला नही है। स्कूल में बच्चा को टाईम पर किताब नही मिलता है लेकिन कोई जवाब देने के लिये तैयार नही लेकिन जब कोई हम गरीब लोग को सही रास्ता दिखाता है तो आपलोग बोलियेगा कि गँगुआ पगला गया है.....!!!!"

गाँव में भरी सभा में आज मुखीयाजी का फजीहत हुआ था!!! शर्मिंदगी से उनकी जुबान नही खुल रही थी लेकिन अपना खानदानी गुस्सा दिखाते हुए बोले "मैं तो लठैत जा रहा हूँ लेकिन देखते हैं कि अघोरा बाबा के श्राप से तुमलोग को कौन बचाता है।"
लठैत भी गुस्सा से बोला जा मरदे "अब जब तक गाँव में एगो अस्पताल नही बन जाये तुम कौनो पूजा के नाम पर चंदा माँगने आया तो टाँग तोड़ देंगे!!!"
तब तक बनारसी काका भी पहुँच चुके थे। सभी को शांत करते हुए बोले "यार डाक्टर लोग भी आजकल कम लुटेरा नही होता है लठैत!! कमीशन खाने के लिये फालतू जाँच लिखता है!!!  ज्यादा कमीशन के लालच में महँगा ब्रांड का दवाई लिख देता है !!! गरीब आदमी को सब लूटने को तैयार है , तुम किस-किस का मर्डर करेगा रे गँगुआ !!!! गरीब आदमी जिसको भगवान का रूप मानता है साला वही गरीब के खून चूस लेता है!!! हम गरीब के पैसा से कुछ लोग विदेश में इलाज कराते हैं लेकिन हम गरीब को कई बार हॉस्पिटल में मरने के बाद घर तक छोड़ने के लिये एगो गाड़ी भी नसीब नही होता है !!! यहाँ डेग-डेग पर अघोरा है!!!
गरीब आदमी को दवा से ज्यादा दुआ की ज़रूरत है जिससे लालची इंसानों से गरीब लोग अपने को बचा सके......!!!

       -  बिपिन कुमार चौधरी

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