सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

व्यंग्य //अगर भोंपू नही होता, तो धर्मों का सत्यानाश हो जाता.....!!!

गाँव के चौपाल का जमघट आज  'दुर्गा-पूजा की तैयारी' पर चर्चा में मशगूल था।
लठैत ने सबसे पहले अपनी बात रखते हुए बोला "देखिये भाई, चंदा जितना लगाना है लगा दीजिये लेकिन पूजा में अबकी ओम  डी.जे. वाला ही आयेगा। सस्ता वाला डी.जे.मंगवा कर आपलोग सब मजा खराब कर देते हैं। अरे भाई बढ़िया आवाज होगा तब ना दस गाँव का आदमी जानेगा कि हमलोग कितना बढ़िया से पूजा कर रहे हैं। इसी आवाज को सुन कर  दस आदमी आपके मेला में आता है और गाँव के लोगों का मान-सम्मान बढ़ता है। पिछले साल ई लोग सस्ता वाला लाउडस्पीकर कर  लिया, कुछ पते नही चलता था कि मंदिर में क्या हो रहा है।"
     कई लड़को ने एक सुर में लठैत का समर्थन किया!!!
बनारसी काका ने आपत्ति जताई, बोले "अपने गाँव में उस समय से दुर्गा-पूजा हो रहा है जब डी.जे.और लाउडस्पीकर दुनियाँ में आया भी नही था। पूजा, प्रार्थना, ध्यान, आराधना आदि के लिये शोर करने की जरूरत नही है। हमलोग पूजा तो  करेंगे ही और इस बात का भी पुरा ध्यान रखना जरूरी है कि पूजा के नाम पर फालतू शोर होने से गाँव के बूढ़ा-बुजुर्ग, बीमार-लाचार लोगों को बेवजह कष्ट नही हो। डी.जे.के आवाज़ से आदमी चिड़चिड़ा  हो जाता है, इससे कमजोर आदमी का बी.पी. बढ़ जाता है। डाक्टर लोग बोलता है कि डी.जे. के कारण बेहरापन का शिकायत बढ़ रहा है। रात में भी तुमलोग डी.जे. बजाओगे जिससे सबलोग का नींद खराब हो जाता है। फिर गाँव-समाज में पढ़ने वाला बच्चा सब भी है, उनलोगों का ध्यान रखना भी जरूरी है। इसलिए पूजा-पाठ में डी.जे.लाने का कोई मतलब नही है।"
    तभी पीछे से कुछ लड़कों की दबी जुबान में आवाज आई "बुढ़ऊ सठिया गये हैं, आजकल बिना डी.जे. के कहीं पूजा-पाठ होता है। अरे मरदे, डी.जे.के बगैर विसर्जन में तनको भी मजा नही आयेगा। एक तो साला नीतीश कुमार दारू बंद कर दिया और अब डी.जे. भी नही बजेगा तो  विसर्जन में नुंगी-डांस और नागिन-डांस क्या हमलोग बुढ़ऊ सबके तरह भाँग-धतूरा खा कर और गाँजा पी कर करेंगे।"
     बनारसी काका अनुभवी थे, उन्होंने लड़कों का मन ताड़ लिया और लठैत ग्रूप को खुश करने के ख्याल से बोले "देखो बेटा पूजा के साथ मनोरंजन भी जरूरी है, इसलिए नवरात्रि के अंत में तुमलोग 'माता का  जागरण'  या रामलीला का आयोजन भी कर लो। विसर्जन के दिन दो-चार घंटा के लिये डी.जे. कर लेना लेकिन अश्लील भोजपुरी और गंदा बोल वाला फिल्मी गाना नही बजाना। ई सब हमलोगों के संस्कृति के खिलाफ है, धार्मिक गाना पर भी जम कर डांस और मस्ती हो सकता है। अरे हमलोग के जवानी के समय बैंड पार्टी वाला आता था, और एक से एक गायक सब ऐसा-ऐसा मधुर गाना गाता था कि  बूढ़ा-जवान सब झूमने लगता था। पर आजकल फैशन के चक्कर में लोग डी.जे.पर गंदा-गंदा गाना बजा कर धर्म-संस्कार का सत्यानाश कर रहा है। तुमलोग गाँव का समझदार लड़का है, तुमलोगों को ई सबसे परहेज करना चाहिये।
   लठैत बिल्कुल गुस्सा से तमतमाते हुए बोला "ए काका आप अपना समझदारी अपने पास रखीये और लड़का लोगों को अपने ढंग से काम करने दीजिये।"
बनारसी काका  भरी सभा में इस तरह अपने अपमान से आहत थे, लेकिन अपमान का घुट पी कर बोले "देखो लठैत औकताओ नही, और आराम से बात करो। अरे पूजा-पाठ सार्वजनिक काम है, इससे किसी को तकलीफ नही होना चाहिये।"
   अब लठैत का पक्का यार हिटलरवा भी गुस्साते हुआ बोला "सालों भर जब दिन में पाँच बार मस्जिद से आजान का कान-फारू आवाज आता है तो किसी को कोई तकलीफ नही होता है। हम हिन्दुलोग जब किसी पूजा-पाठ में कोई आयोजन करते हैं तो प्रदूषण फैलने लगता है, लोग बीमार पड़ने लगता है, बच्चा लोग का पढाई बरबाद होने लगता है। सरकार, डाक्टर, पर्यावरणविद, सोसल एक्टिविस्ट सब मिल कर उपदेश देने लगता है। काहे भाई हिंदूलोग को पूजा-पाठ करने का इस देश में कोई आजादी नही है।
  अब तक चुपचाप रहने वाला गंगुआ ने लठैत और उसके साथियों को समझाना शुरू किया। "देखो हिटलरवा आज देखा-देखी लोग हर छोटा-बड़ा आयोजन में लाउडस्पीकर और डी.जे. का धरलल्ले से उपयोग करने लगा है। फिफ्टी परसेंट साम्प्रदायिक दंगा का कारण भी यही लाउडस्पीकर और डी.जे. है। लोग सर्वशक्तिमान ईश्वर के आराधना के नाम पर खुल्लम-खुल्ला दिखावा पर उतर गया है। क्या हिंदू, क्या मुस्लिम सबको यही लगता है कि अगर लाउडस्पीकर और डी.जे. उसके मंदिर-मस्जिद से उतर गया तो उसका धर्म ही ख़त्म हो जायेगा और इसको धर्म का कुछ ठेकेदार लोग  मज़हब पर गम्भीर संकट बता कर दंगा करवाने का षडयंत्र भी रच दे रहा है। अरे भाई तुमलोग ये बताओ कि उन्नीसवीं सदी के अंत में  'जान फिलिप रेइस ' लाउडस्पीकर का आविष्कार किया तो उसके पहले इस दुनियाँ में हमलोगों का धर्म और मजहब नही था क्या ????

     कुछ देर के लिये गाँव के चौपाल का जमघट बिल्कुल खामोश हो गया।
तब बनारसी काका ने बोलना शुरू किया "देखो भाई  लाउडस्पीकर और डी.जे. उतारने से धर्म और मजहब का नाश नही होता है लेकिन एक लोकतांत्रिक देश में किसी भी धर्म के मानने वाले लोगों के आस्था पर चोट करना भी अच्छी बात नही है!!!"
बनारसी काका के पाला बदल लेने से गंगुआ थोड़ा घबरा गया, लेकिन थोड़ी देर में खुद को सम्भालते हुए बोला "जानते हैं काका सबसे बड़ा परेशानी क्या है, आज हर धर्म को मानने वाला लोग पूजा-पाठ के नाम पर अपने धन-बल का शक्ति-प्रदर्शन करने लगा है। हमारे धर्म और आस्था का नेतृत्व कट्टरपंथी विचारधारा के लोग करने लगे हैं। सोनू निगम का अगर आजान के नाम पर दिन-प्रतिदिन बढ़ते शोर के विरुद्ध आवाज उठाना गलत है तो धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर मुल्ला-मौलवियों द्वारा अनाफ-सनाफ फतवा जारी करना भी सरासर गलत है, लेकिन सबसे बड़ा गलती एक आम भारतीय कर रहा है जो धर्म के ठेकेदारों और उनके कथित  रहनुमाओं को  आँख मूंद कर समर्थन दे रहा है। इससे ना तो धर्म बचेगा और ना ही इंसानियत, आखिर कब तक हमलोग धर्म और आस्था जैसे पवित्र चीजों के लिये मनगढ़ंत इगो का निर्माण कर मानवता को शर्मसार करते रहेंगे।
गंगुआ का ज्ञान सबके सर चढ़ कर बोल रहा था।
गंगुआ ने फिर तमाम लोगों से सवाल किया कि आपलोग बताईये कि तीन ओर समुद्री सीमा से घिरे गंगा-यमुना  और ब्रह्मपुत्र  आदि नदियों वाले देश में लोग जल-प्रदूषण से परेशान हो कर डिब्बा वाला पानी खरीद कर पीने को मजबूर हो गया है। आने वाले समय में लोगों को अपने साथ शुद्ध हवा साँस लेने के लिये ऑक्सिजन का सिलिंडर साथ में ले कर चलना होगा लेकिन जब लगातार बढ़ते शोर से ध्वनि-प्रदूषण खतरनाक स्तर पर चला जायेगा तो लोग क्या करेंगे????

जब किसी ने कोई जवाब नही दिया तो बनारसी काका ने मजाक में पूछा "ए ज्ञानी बाबा, हमलोग तो सरपट मूर्ख हैं, आप ही अपना ज्ञान बघारिये....।
गंगुआ इस चुटकी से थोड़ा शर्मा गया लेकिन सबको समझाते हुए बोला "पूजा-पाठ, कीर्तन-शिवचर्चा, नमाज-जलसा सब जरूरी है लेकिन धार्मिक दिखावे के नाम पर पर्यावरण और समाजिक-सौहाद्र  से खिलवाड़ बिल्कुल भी जायज नही है!"
लठैत और हिटलरवा के साथ-साथ उसका पुरा ग्रूप अब शांत हो चुका था।
तभी अचानक मुखियाजी चौपाल पर पहुँच गये और उन्होंने आते ही कहा कौन इस दुर्गा पूजा में डी.जे.नही बजने देगा हम उसका सात पुश्त को सबक सीखा देंगे.....!!!!!!!

और सबलोग खिलखिला कर हँस पड़े
😆😆😆😆😆😆😆😆😆😆😆😆😆

-  बिपिन कुमार चौधरी

(अगर आपको यह  लेख या व्यंग्य पसंद आया तो लेख के नीचे के साझा लिंक पर जा कर अपने facebook  और twitter पर ज़रूर share करें )

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

व्यंग्य // ऐसे तो भगवान और अल्लाह बेघर हो जायेंगे....!!

ब्रह्म-बाबा थान गाँव का एक मात्र ऐसा जगह था, जहाँ पूरे गाँव के बच्चे लोग बिना किसी भेदभाव के खेला करते थे। दरअसल ब्रह्म-बाबा थान के एक ओर बाभन टोली थी, जहाँ ब्राह्मणों की संख्या भले अधिक हो लेकिन सभी जाति के लोग वहाँ प्रेम-भाव से रहते थे। कुछ ही दूरी पर मुशहरी-टोला था जहाँ अधिकतर हरिजन और दलित-समुदाय के लोग के लोग निवास करते थे। ब्रह्म-बाबा थान के दूसरी ओर हाजी टोला था। यह एक बंगलादेशी मुसलमान बहुल गाँव था। ब्रह्म-बाबा थान दरअसल एक पीपल के पेड़ के नीचे का चबूतरा था जहाँ बाभन टोली के महिला और पुरुष अक्सर किसी शुभ कार्य से पहले पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लेने आते थे। ब्रह्म-बाबा थान से बस कुछ ही दूरी पर हाजी साहब का मजार था जहाँ हिन्दु-मुस्लिम दोनों ही सिर नवाते थे। यह कुल दो बीघा का परती जमीन ना सिर्फ हिन्दु-मुस्लिम बच्चों के खेलने और व्यायाम का स्थान था बल्कि हिन्दु-मुस्लिम के साझा पूजा-स्थली और गंगा-यमुनी संस्कॄति और गाँव के लोगों के आपसी भाईचारे का केन्द्र था। दरअसल यह जमीन बाभन-टोली के बनारसी काका का था, जो कुछ वर्षों पहले गंगा-धार  में चला गया था। गंगा-धार से बाहर निकलने पर सभी ने ...

कहानी // सफलता का रहस्य

खुद पर विश्वास  करने वाला हमेशा सफल होता है... बुलाकी एक बहुत मेहनती किसान था। कड़कतीधूप में उसने और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने रात दिन खेतों में काम कियाऔर परिणामस्वरू...

व्यंग्य // सबसे बढ़िया टियूशनिया मास्टर......!

      गाँव के चौपाल पर आज काफी गहमा-गहमी थी। लठैत सिंह गुस्सा से आग-बबूला था बोला "ए  बनारसी काका, ई देखिए तो कॉन्वेंट वाला प्रिन्सिपल साहब का केतना जुल्म है। कल मेरा बेटा फें...

गरीबों_की_बढ़ी_चर्बी_से_सब_परेशान

#गरीबों_की_बढ़ी_चर्बी_से_सब_परेशान (व्यंग्य) ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी फेंकना ऋषि आग बबूला हो कर पुलिस को भद्दी भद्दी गालियां दे रहा था। तभी जामुन काका ने फेंकना को टोका "क्या हुआ रे फेंकना, काहे दरोगवा को गरिया रहा है। फिर आज सौतारी में तुमको धड़ लिया क्या ? फेंकना यह सुनते ही गर्म हो गया, बोला काका इज्जत करते हैं तो ढ़ेर मत बोला कीजिए। आपका बेटवा कौन ऐसा दिन है, जो खा पी कर रात में महाभारत नहीं करता है लेकिन आपका या दारोगवा का का मजाल है कि उसे कोई कुछ बोल दे। आख़िर वह सरपंच का बेटा है और मैं एक गरीब आदमी हूं और मुंह खोलवाए हैं तो सुन लीजिए पिछले बार जब आप ही दारोगवा को बुला कर धड़वाए थे तो यही शर्त पर छूटवाए थे कि दोनों को शाम तक दो देशी मुर्गा के साथ साथ एक बोतल ब्रांडेड फुल पहुंचवाना होगा और आए हैं नाटक बतियाने। तब तक थोड़ी भीड़ भी जमा हो गई थी। सरेआम अपनी मिट्टी पलित होते देख सरपंच जामुन काका ने पैंतरा बदला। बोले तुम तो नाहक गर्म हो रहे हो। मुर्गा लाकर तुम्हीं तो बनाया था और आधा से ज्यादा बोतल भी तुम्हीं खाली कर दिया था। अरे वह तो तुम्हारा इज्जत रखने के लिए हम और दरोगवा थोड़ा सा...

मुसाफिर

ए वक्त तेरी रफ्तार बहुत तेज है पर रुकना मुझे भी आता नही है ठोकरें तो मैंने भी बहुत खाई है पर झुकना मुझे भी आता नही है अबकी जख्म कुछ ज्यादा  गहरा है पर तू भर देगा उसे भी क्योंकि तुझे पता है कि तेरा ये मुसाफिर कभी ठहरा नही है - बिपिन कुमार चौधरी

व्यंग्य // जनता ने हड़काया तो ई.वी.एम. खराब है......😎😎😎

       गाँव के  चौपाल पर आज एक बहुत महत्वपूर्ण गरमागर्म बहस  छिड़ चुका था।  गंगुआ बड़े गुस्से में तमतमाते हुए बोला "देखो भाई ईमानदार होने  का ढोल पीटना बहुत आसान है, लेकिन सचमुच में ईमानदार होना बहुत मुश्किल है। सबसे बड़ी बात एक बेईमान आदमी के नज़र में कोई ईमानदार हो ही नही सकता है और इससे भी बड़ी बात यह है  कि दुनियाँ में अधिकांश लोग इसलिए ईमानदार बनें बैठे हैं क्योंकि उसको बईमानी का अब तक मौका ही नही मिला है।"       लठैत को भी गुस्सा आ गया, बोला "ज्यादा ज्ञान मत झाड़ो और सबसे पहले तुम्हीं बताओ कि तुम और तुम्हारा नेता लोग किस कोटि में है!!!!" गंगुआ ने लठैत को समझाया कि देखो भाई हम जानते हैं कि तुम घर से भौजाई से लड़ कर आया है और गुस्सा झुठो हम पर उतार रहा है!!!! अरे ओतने खून में ताव है तो तनी जाके मुखियाजी से लड़ो कि तुम्हारा इन्द्रा-आवास अब तक काहे नही बना है....। ऊ तो तुमसे पार लगेगा नही, बस चौपाल पर बैठ कर चार गो नेता को गरिया के अपने को बड़का शेर समझते हो!!!"       लठैत की दुखती रग पर चो...

रहस्योद्घाटन

             रहस्योद्घाटन ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी हम उन मासूमों को बचा नहीं सके,  डाक्टर बाबू उनके लिये दवाई ला नहीं सके,  माँ की ममता आँखो से सैलाब बन कर निकल गया,  दिखावटी मातम मनाने का अवसर हम गंवा नहीं सके .... अपने कष्टों को तोतली जुबां में वो  बता नहीं सके,  सियासत के मसीहा अपना हुनर दिखा नहीं सके,  लाशों के ढ़ेर को देख भी मूकदर्शक यह मुल्क हैं,  अपनी आक्रोश को भी हम जता नहीं सके... कुछ सीढ़ियों के अभाव में जिंदा जल गये,  कुछ दुस्कर्मीयों के हैवानियत के हत्थे चढ़ गये,  हिंदु-मुस्लिम गाय-गोबर से अभी हमें फुरसत नहीं,  कुछ दो सो बच्चे दवाइयों के अभाव में पंचतत्व में मिल गये वक्त का क़हर न्यौता देकर नहीं आता है,  सिस्टम के हाथों सिसक कर आमजनों के सांसो का डोर टूट जाता है,  जाँच कमिटी का गठन कर सियासत मलाई खाता है,  चुनाव आने पर रहस्यों का राज हमें बताता है... मंदिर मस्जि़द गुरूद्वारे से उन्हें फुरसत नहीं है,  हमारे वोटों की भी उन्हें अभी जरूरत नहीं है,  ...

कविता // वक्त

✍🏻✍🏻 ऐ वक्त थोड़ा वक्त दे मुझे बहुत कुछ भुलाना है मुझे रूठना भी भूल गया हूं, रूठे को मनाना भी भूल गया हूँ, कागज के नाव पर सवारी करके दिल को बहलाना है मुझे जिंदगी बहुत कुछ दिया है तूने, थोड़ा हिम्मत मुझे और दे, कुछ और जिंदगी को सजाना है मुझे अभी बहुत कुछ भुलाना है मुझे  . . . - बिपिन कुमार चौधरी

९९. जनक्रांति @

अभी थोड़ा जगे हैं हम, जगाना अभी बांकी है, किया अभी जो हमने है, वह छोटी सी झांकी है, शोषण बहुत सहा है हमने, इसलिए यहां शांति है, खोफजदा बेकार हैं लोग, अपने हक की यह क्रांति है जय जय जनक्रांति, जय जय जनक्रांति... जय जन क्रांति जय जन क्रांति, जय जन क्रांति जय जन क्रांति आओ मिलकर भरें ऐसी हूंकार, स्वस्थ बने समाज, शिक्षा का हो प्रसार, चारों ओर हो शांति ही शांति ... जय जन क्रांति जय जन क्रांति... जनता के सेवक से जनता सताए जा रहे हैं, लोकतंत्र के मालिक आंसू बहाए जा रहे हैं, आओ मिलकर दूर करें भ्रष्टाचारियों की भ्रांति, जय जन क्रांति जय जन क्रांति लाचारों के आंखों का आंसू जब पोछेंगे हम, पूरा होगा स्वामी विवेकानंद वाले भारत का स्वप्न, आयेगी हमारे देश में अमन चैन और शांति, जय जन क्रांति, जय जन क्रांति माना हमारा डगर थोड़ा कठिन है, अपनी चट्टानी एकता पर हमें भी यकीन है, हमारी चाहत सबकी तरक्की, सबकी उन्नति ... जय जन क्रांति जय जन क्रांति सेवा का जुनून जलाए रखना है, संघर्षपथ पर नित्य आगे बढ़ते रहना है, तभी मिलेगी चंद्रशेखर सुभाष के आत्मा को शांति, जय जन क्रांति, जय जन क्रांति आओ बंधु हाथों स...

कविता // कलम की धार

कलम की धार थोड़ी कुंद पड़ गयी है वर्ना लोग कभी इसके दीवाने थे बहुत दिनों बाद फुरसत मिली है अपने पहले प्यार से ईश्क फरमाने के अब तो इस प्यार मे कुछ ज्यादा सुकून  मिलता है पहले ये...