गाँव के चौपाल पर आज कुछ ज्यादा भीड़ नही थी। बनारसी काका आल्हा गा कर चौपाल पर बैठे लोगों का मनोरंजन कर रहे थे। इसी बीच अपने हल बैल के साथ किशन वहाँ से गुजर रहा था। चौपाल के पास पहुँचते ही उसने बनारसी काका को टोका "ए काका, अगर ई मास्टर लोग अपना वाजिब मांग के लिये हड़ताल और आंदोलन कर रहा है तो बिल्कुल ठीक बात है। लेकिन स्कूल सब में देखते हैं कि मास्टर लोग अलग-अलग संघ के नाम पर अपने-अपने में आपस में लड़ते रहता है। अब आप ही बताईये कि ई सब क्या ठीक बात है....!!!! अरे भाई जब अपना वाजिब हक (समान काम का समान वेतन) के लिये लड़ने में सब मास्टर में आपस में एकता नहीं है तो ई लोग गाँव-समाज के बच्चा को एकता का क्या पाठ पढ़ायेगा?????
लठैत ने भी चुटकी लेते हुए कहा "अरे मरदे, अगर एकता रहता तो अब तक सरकार क्या ऊपर वाला भगवान भी मास्टर लोगों का वाजिब बात नहीं मानने का हिम्मत नहीं करता!!! अरे संघ-संघ वाला खेल के चक्कर में ही सब मास्टर लोग ठगाता रहता है और पटना के सड़क-चौराहे पर इन्हीं लोगों का चेला-चटिया लोग सरकार के इशारा पर इनलोगों को डन्गाता रहता है।सबसे शर्म का बात तो ई है कि बेशर्म के तरह मार खा कर भी इनलोगों का जमीर नही जागता है और अपने भाई-बंधु का दर्द समझ में नहीं आता है। सारा दुनियाँ जानता है कि
~¦ आपस में भाई करे मार, तो घर लूटे गंवार ¦~
लठैत के मुँह से ऐसी बात सुन कर चौपाल पर बैठे गाँव के हेडमास्टर चंदन बाबू को बहुत गुस्सा आ गया। उन्होंने लठैत को धौपते हुए बोलना शुरू किया "देख लठैत, पढ़ने के टाइम में तो तुम गुल्ली-डंडा में अपना समय खराब कर जिंदगी नरक बना लिया। मुखिया जी के चमचागिरी में तुम्हारा दिन गुजरता है और बात ऐसा बनाता है कि महात्मा गाँधी इस दुनियाँ से जाते समय सारा ज्ञान का जंतर-मंतर तुम्हीं को सौंप कर गये थे।
लठैत भी कहाँ कम था बोला "जाइये मरदे, पढ़-लिख कर बड़का ज्ञानी बनने का नौटंकी मत करिये। अरे भाई, नहीं पढ़े तो क्या हुआ मजदूरी करके पेट भरते हैं, लेकिन क्या मजाल है कि कोई जरा भी हम मजदूर लोगों का हकमारी कर ले, कितना भी आपस में झगड़ा रहेगा लेकिन सब मिल कर सबसे पहले हकमारी करने वाला को ऐसा सबक सिखायेंगे कि साला दोहरा के फिर हमारे ग्रूप के किसी गरीब मजदूर को परेशान करने का हिम्मत नही करेगा लेकिन आपलोग तो पढ़-लिख कर भी हम गंवार लोगों से बदतर हैं। अरे आप ही का कुछ साथी लोग पटना में मार खाया और आपमें से ही कुछ मास्टर लोग बोला कि वो मेरा संघ का नही है। अब आप बताइये जब आपलोग में आपस में ही एकता नही है तो फिर बच्चा लोगों को आपलोग क्या एकता का प्रेरणा दीजियेगा। अरे आपलोगों का स्थिति देख कर तो हमको यही डर लगता है कि आपलोग से पढ़ा बच्चा-लोगों को किताबी ज्ञान चाहे जो मिल जाये लेकिन आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रेरणा शायद ही मिलेगा। अगर ऐसा ही रहा तो एक दिन फिर देश जरूर गुलाम हो जायेगा।
चंदन बाबू को अब कोई जवाब नही सूझ रहा था। काफी समय चुप रहने के बाद बोले "अरे मरदे, हम जिस संघ का प्रखंड-अध्यक्ष हैं, उस संघ का मास्टर लोग पटना में कभी मार नहीं खाया है।"
अबकी किशन ने बड़ी घृणा भरी नज़रों से चंदन बाबू को देखते हुए बोला "थू.... थू.....थू.... मास्टर साहब!!! आपके मुँह से इस तरह का बात बिल्कुल शोभा नही देता है। अरे भाई पुरा दुनियाँ सिर्फ इतना जानता है कि पटना में सड़क पर मार खाने वाला लोग सिर्फ और सिर्फ प्राइमरी स्कूल का मास्टर था, जो अपने वाजिब हक और सुप्रीम कोर्ट के आदेश 'समान काम के लिये समान वेतन' को लागू कराने के लिये विधानसभा का घेराव करने गया था। अब आप बेशर्म के तरह बोलते हैं कि मार खाने वाला मास्टर लोग हमारे संघ का नही था। अरे भाई, जब मास्टर का ही इज्जत नही बचा तो आप अपना संघ का डुगडुगी बजा कर कौन बड़का तीर मारने का नौटंकी कर रहे हैं।"
बनारसी काका ने किशन की बातों का समर्थन करते हुए बोला "देखिये चंदन बाबू, आज अगर मीडिया के किसी एक आदमी पर हमला होता है, तो पूरा देश का मीडिया उसका नही सिर्फ निंदा करता है बल्कि दोषियों पर कार्यवाई करने के लिये दबाव बनाया जाता है। तभी भारत का चौथा स्तम्भ भारत में इतना मजबूत है। आपलोग संघ के राजनीति के चक्कर में समाज को शिक्षित करने वाले शिक्षक-समुदाय के प्रतिष्ठा का बंटाधार कर दिये और अपने को बड़का ज्ञानी समझते बने फिरते हैं। आपलोग के इसी मूर्खता के कारण सरकार आपलोग का शोषण कर रही है। यही हालात रहा तो फिर आपलोग भूल जाइये 'समान काम, समान वेतन!!!!"
चंदन बाबू ने बड़े ही ताव में आकर बोलना शुरू किया "नही बनारसी बाबू, आपलोग किसी भ्रम में नही रहिये!!! हमलोग सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई शुरू कर दिये हैं। बिहार के एक-एक स्कूल में तब तक ताला लटका रहेगा, जब तक बिहार सरकार सभी शिक्षकों को समान काम का समान वेतन नही दे देती है।"
अब तक बिल्कुल चुपचाप रहने वाले गंगुआ ने बड़े ही शायराना अंदाज में मुँह खोला "ए मास्टर साहब, आपके बात से हमको एक फिल्मी डाइलॉग याद आ गया....
क्या बोला था, हाँ...
दिल को बहलाने के लिये गालिब, ख्याल बहुत अच्छा है.....,
अरे मरदे आपलोग तो खुद ही एक-दूसरे का टाँग खींचते रहते हैं। पिछले बार TET पास टीचर को आपलोग ना सिर्फ अनट्रेंड बोल कर ग्रेड-पे से वंचित कर दिये बल्कि ट्रेंड TET को भी दो साल का लोचा लगा कर चाइनीज वेतनमान में भी उनलोगों को बड़का वाला अँगूठा दिखा दिये। अब अपना नेतागिरी का बारी आया तो सबसे सहयोग का अपील कर रहे हैं। अरे भाई , आपलोग को इतना मामूली बात काहे समझ में नही आता है कि बबूल का पेड़ लगाने वाले को आम फलने का उम्मीद नही करना चाहिये।"
चंदन बाबू ने अपना आखरी दांव खेला "देखिए आपलोग समझ नही रहे हैं, ये बहुत महत्वपूर्ण समय है बिहार के सभी शिक्षकों को स्कूल में पूर्ण तालाबंदी कर देना चाहिये। अगर इस बार शिक्षक लोगों ने एकता का परिचय नहीं दिया तो सब सत्यानाश हो जायेगा!!!"
बनारसी काका ने एकएक ठहाका लगाया "ऐसा नही बोलिये चंदन बाबू!!! अगर बिहार सरकार ने सच में समान काम का समान वेतन पूरी ईमानदारी से बिहार के सभी शिक्षकों को दे दिया तो आपलोगों जैसे नेताओं की राजनीति और चंदा उगाही की दुकानदारी बंद हो जायेगी। आज अधिकांश शिक्षक संघ के नेताओं के खाने और दिखाने के दो अलग-अलग दाँत हैं। सरकार से ज्यादा अधिकांश शिक्षक संघ के नेता लोग ये नही चाहते हैं कि शिक्षकों को उसका वाजिब हक मिल जाये ...। माध्यमिक शिक्षक संघ के नेताओं ने बिना किसी ठोस बातचीत के बगैर मैट्रिक-इंटर के कॉपी मूल्यांकन के बहिष्कार आंदोलन को वापस ले कर कितने शिक्षकों के अरमान और विश्वास की धज्जियां उड़ा दी। आपलोगों में से बहुतों ने अब तक शिक्षक-समुदाय को मुंगेरी लाल का हसीन सपना दिखा-दिखा कर अपना उल्लू सीधा करने का काम किया है। अब भी सारे लोग एक मंच पर आकर अन्याय और शोषण के विरुद्ध महासंग्राम का शंखनाद करें नहीं तो शिक्षक-बंधु एक बार फिर से निश्चित रूप से ठगे जाने वाले हैं।
- बिपिन कुमार चौधरी
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