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व्यंग्य // मेरा देश बदल रहा है.....😫😫😫

लठैत का गुस्सा ना जानें क्यों सातवें आसमान पर था!!!
गंगुआ उसे समझाने की कोशिश कर रहा था। देख लठैत ये जो हमारे भारतीय सैनिक हैं ना वो बहुत पराक्रमी और शूरवीर हैं। इनके डर से ही  हमारे दुश्मन हम पर कभी सीधा हमला करने का दु:साहस नही करते हैं। कुछ लोग हमारे देश की शांति-व्यवस्था में दखल डालने के लिये घुसपैठ और आतंकवाद का सहारा लेते रहे हैं। कई वार हमारे राष्ट्र को इन आतंकवादियों ने गम्भीर नुकसान भी पहुँचाया है लेकिन हमारे जाबांज सैनिकों ने अपनी  जान की परवाह किये बगैर इनलोगों को मुँहतोड़ जवाब दिया है। इन्हीं सैनिकों की बदौलत हमारे देशवासी निफिक्र  हो कर शांति से रात को सोते हैं। अरे वो तो  हमारा देश एक शांतिप्रिय देश है नही तो ये सैनिक लोग दुश्मनों के घर में घुस कर उन्हें जहन्नुम पहुँचाने का पुरा काबिलियत रखते हैं। हाल ही में भूटान और पाकिस्तान में किया गया सफल सर्जिक्ल स्ट्राइक इसका सबसे बड़ा सबूत है। इसलिए पुरा भारत इन वीर सैनिकों को सलाम करता है।
लठैत गुस्सा से झुंझलाते हुए "क्या मरदे, तुम कौन दुनियाँ में हो!!! यही वीर सैनिक लोग काश्मीर में जब आतंकवादियों को पकड़ने के लिये ऑपरेशन कर रहे होते हैं तो कुछ सिरफिरा छोकरा लोग जेहाद की नौटंकी के नाम पर  इनलोगों पर पत्थरबाजी करता है। अभी कुछ दिन पहले की बात है चुनाव करा कर लौट रहे सैनिकों को कुछ पागल-आवारा टाइप का लड़का लोग ना सिर्फ गाली दिया बल्कि थप्पड़ भी मारा और हेलमेट छीनने का प्रयास किया और हमारे देश के नेता जी और बुद्धिजीवी लोग सैनिकों को संयम रखने का उपदेश दे रहे हैं। अपने घर-परिवार से कोसों दूर कठिन परिस्थितियों में अपने मातृभूमि की सुरक्षा के लिये अपना सबकुछ न्योछावर करने के लिये चौबीसों घंटे तैयार रहने वाले वीर जवानों का क्या  यही मान-सम्मान है????
गंगुआ ने एक बार फिर समझाया "देख लठैत, ये पत्थर फेंकने वाले लोग इस देश के कम उम्र के कुछ  ऐसे नौजवान लड़के हैं जो कुछ दुष्ट  लोगों के बहकावे में आकर और कुछ पैसों के लालच में रास्ता भटक गये हैं। इनलोगों को मुख्यधारा में लाने के लिये ये जरूरी है कि सेना संयम से काम ले। फिर शूरवीर भारतीय सैनिक अपना ताकत और बम-बारूद इनलोगों के ऊपर बरबाद करे, ये उचित भी  नही है।"
लठैत जोर-जोर से ताली बजाते हुए "क्या बात है गंगुआ, जो लोग हमारी सुरक्षा के लिए सीने पर गोली खाने को तैयार रहते हैं, उनको कुछ नीच और दुष्ट प्रवृति के लोग अपने घिनौने स्वार्थ के लिये  अपमानित करते हैं और हमलोग सैनिकों को संयम बरतने और पेलेट-गन का उपयोग नही करने का सलाह देते हैं। आतंकवादियों और देशद्रोही लोगों के लिये इस देश में मानवधिकारों की रक्षा करने वाली एक बहुत बड़ी फौज है लेकिन दिन-रात देश की सुरक्षा करने वाले सैनिकों के मान-सम्मान का किसी को कोई फिक्र नही  है। क्या इस देश में सैनिकों का खून और बलिदान इतना सस्ता हो गया है......!!!!
गाँव का सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा व्यक्ति गंगुआ को अब कोई जवाब नही सूझ रहा था। उसने बहस ख़त्म करने के ख्याल से सिर्फ इतना बोला "देख लठैत, तुम तो ठहरा गंवार तुमको ये सब बात समझ में नही आयेगा!!!"
गंगुआ का इस तरह का जवाब पा कर लठैत  को थोड़ा गुस्सा आ गया लेकिन उसने खुद को शांत रखा। अचानक कुछ देर बाद उसने  गंगुआ की हथेली को अपने हाथ में ले कर मकई का बोरा सीने वाला सूआ उसके हथेली के आर-पार कर डाला। देखते ही देखते गंगुआ का पुरा हाथ खून से लहू-लूहान हो गया। गंगुआ ने झटके से अपना हथेली लठैत के हाथ से छुड़ाया और लठैत को बीस-बाईस फाइट रसीद कर दिया।

समान्यतः गर्म मिजाज का लठैत, आज अपने से बेहद कमजोर कद-काठी वाले गंगुआ से मार खा कर भी ना जाने क्यों ठहाका लगा रहा था और दूसरी ओर गंगुआ दर्द से चिल्लाते हुए अपने गमछा से हथेली को बाँध कर खून रोकने का प्रयास कर रहा था। थोड़ी देर में ही वहाँ काफी भीड़ जमा हो गयी थी लेकिन किसी को दोनों में किसी से कुछ पूछने की हिम्मत नही हो रही थी। हाँ, गंगुआ अब भी ना सिर्फ दर्द से छटपटा रहा था बल्कि लठैत को गंदी-गंदी गाली दे कर उसके कुल-खानदान को बरबाद करने की लगातार धमकी भी दे रहा था।
    तभी मुखिया जी ने आते ही लठैत को धमकाया "क्या रे लठैत, तुम अब गाँव में गुंडागर्दी पर उतर गया है!!! ई हम क्या सुन रहे हैं कि तुम दिन-दहारे गंगुआ का मर्डर करना चाह रहा था???"
लठैत ने सबको समझाते हुए बोला "अरे भाई, मरे हुए आदमी को कोई क्या मारेगा!!! ई गाँव का सबसे बड़ा विद्वान गंगुआ हमको संयम का पाठ पढ़ा रहा था। अभी थोड़ा देर पहले  ई हमको उपदेश दे रहा था कि अगर पग्लेट टाइप का छोकरा-लोग भारतीय सैनिकों पर पत्थर भी फेंके तो उन्हें  संयम से काम लेना चाहिये। आपलोग देखिये मामूली सूआ के हथेली के आर-पार हो जाने पर यही आदमी दर्द से  कितना तड़प रहा है और संयम का उपदेश देने वाला ज्ञानी व्यक्ति लठैत सिंह को उसके कुल-खानदान सहित बरबाद करने का धमकी दे रहा है। अरे गंगुआ इस देश के  बुद्धिजीवी और ज्ञानी लोगों को सैनिकों की जगह हाफ-माइंड जेहादी लोगों को उपदेश दे कर उसे सही रास्ते पर लाने का प्रयास करना चाहिये....!!!!
आखिर कश्मीर में सेना के दर्द को कोई क्यों नहीं समझ पा रहा है.....

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" हाथों में हथकड़ी जुवां पर ताले हैं
  सहमे - सहमे सीमा के रखवाले हैं "
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बनारसी काका ने भी लठैत की बातों का समर्थन करते हुआ कहा कि यह हमारे देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि जो लोग इस देश के मान-सम्मान की हिफाजत के लिये अपना जान देने को तैयार हैं, उन्हें ही कुछ लोग ना सिर्फ अपने गलतबयानी से अपमानित कर रहे हैं, बल्कि पत्थर फेंक कर उन पर सीधे जानलेवा हमला करने वाले लोगों के विरुद्ध भी सैनिकों को  संयम रखने का उपदेश दिया जा रहा है। अगर अब भी हमलोग जागरुक नही हुए तो अंग्रेजों ने जाते-जाते भारत के तीन टूकड़े कर डाला और आने वाले समय में इसके और भी कितने टूकड़े हो सकते हैं। इन जेहादी भाइयों के बारे में तो सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि....

"उम्र जन्नत में रह कर,
उसे उजाड़ने में गुज़ार दी,

और जिहाद बस इस बात का था,
कि मरने के बाद जन्नत मिले...!"

तभी लठैत ने बोलना शुरू किया कि कई बार शरीर को ज़माने वाली ठंड में सैनिक लोग भूखे प्यासे ड्यूटी करते हैं। गजब तो तब हो जाता है कि तेज बहादुर यादव नाम का सैनिक सोसल मीडिया के माध्यम से यह शिकायत करता है कि कुछ लालची अफसरों के कारण सीमा पर तैनात सैनिकों को ढंग का खाना भी नसीब नही होता और कुछ ही दिनों के बाद उसे बरखास्त कर दिया जाता है। कोई जरूरी नही कि तेज बहादुर सच बोल रहा हो, ऐसा सम्भव है कि बहादुर जी भी कुछ ज्यादा के लिये भारतीय अफसरों को बदनाम कर रहे हों लेकिन अगर तेज बहादुर की बात में जरा भी सच्चाई है तो ये हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है और एक सैनिक के रूप में कुर्बानी देने वाले महान योद्धाओं की आत्मा स्वर्ग में यही बोल रही होगी

ग़लतफ़हमी में ज़िंदगी का हर लम्हा गुज़र गया,
धोखा मिला हमको,
उसका वक्त संवर गया,
जिससे उम्मीद लगाए चलते रहे जां हथेली पे लेकर ,
मतलब निकल गया और वो  हमसे बिगड़ गया !!

-  बिपिन कुमार चौधरी

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